संभल के गांव सलेमपुर सलार उर्फ हाजीपुर में सरकारी जमीन पर बने मस्जिद और मदरसे को रविवार को प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर ध्वस्त करा दिया। कब्जा मुक्त कराई गई जमीन को तुरंत 20 जरूरतमंद लोगों को पट्टे पर आवंटित कर दिया गया।
प्रशासनिक आदेश के बाद पिछले दो दिनों से कब्जाधारी स्वयं मस्जिद और मदरसे को तोड़ रहे थे, लेकिन रफ्तार धीमी होने के चलते रविवार को तहसील प्रशासन ने कार्रवाई अपने हाथ में ले ली। तहसीलदार न्यायालय में ग्राम सभा बनाम हाजी शमीम मुतवल्ली के नाम से दर्ज मामले की सुनवाई के बाद 2 सितंबर 2025 को जमीन को सरकारी घोषित करते हुए कब्जा हटाने के आदेश जारी किए गए थे। इसी क्रम में तहसीलदार सदर धीरेंद्र कुमार सिंह ने 1 जनवरी को टीम भेजकर 439 वर्गमीटर जमीन को कब्जा मुक्त कराने के निर्देश दिए थे।
दूसरे पक्ष के आग्रह पर प्रशासन ने मस्जिद और मदरसे को स्वयं हटाने का अवसर दिया था, लेकिन निर्धारित समय में पूरी जमीन खाली न होने पर रविवार को तहसीलदार और सीओ मौके पर पहुंचे और निर्माण ध्वस्त कराया गया। इसके बाद खाली हुई जमीन को जरूरतमंदों के बीच पट्टे पर बांट दिया गया।
तहसीलदार के अनुसार, कुल 1700 वर्गमीटर जमीन कब्जा मुक्त कराई गई है, जिसमें से 20 पात्र लाभार्थियों को 80-80 वर्गमीटर के पट्टे दिए गए हैं, ताकि वे वहां अपने आवास बना सकें। आवंटियों की सूची भी सार्वजनिक कर दी गई है। प्रशासन का अनुमान है कि खाली कराई गई जमीन की कीमत लगभग एक करोड़ रुपये है।
कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए छह थानों की पुलिस फोर्स और पीएसी तैनात रही। एसपी और एएसपी स्वयं पूरे अभियान पर नजर बनाए हुए थे।
इसी दौरान, मस्जिद और मदरसे को ध्वस्त कर वापस लौट रही प्रशासनिक टीम की नजर रास्ते में एक मकान पर पड़ी, जहां बिना बिजली मीटर के बिजली उपयोग किए जाने का मामला सामने आया। संविदा लाइनमैन ने आरोप लगाया कि मीटर उखाड़कर फेंक दिया गया था। इस पर मकान मालिक अनीस और उसके बेटे नईम के खिलाफ शांतिभंग में चालान कर दोनों को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया गया।