झूलन चलो हिंडोला ब्रज लाडली को... श्याम प्यारे संग झूला झूल रही राधा प्यारी... हरियाली तीज पर बरसाना के राधारानी मंदिर में कुछ ऐसा ही भक्तिमय नजारा देखने को मिला। हरी पोशाक में स्वर्ण हिंडोले पर विराजमान राधा-कृष्ण की मनोहारी झांकी के दर्शन को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लाडली जी की एक झलक पाने के लिए भक्त लालायित नजर आए और मंदिर परिसर राधे-राधे के जयकारों से गूंजता रहा।हरियाली तीज पर ब्रह्मांचल पर्वत पर छाई हरियाली के बीच लाडली जी मंदिर का नजारा देखते ही बन रहा था। सुबह से ही देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बरसाना पहुंचने लगे। सुहाने मौसम के बीच भक्तों ने गहवरवन की परिक्रमा लगाई और लाडली जी के दर्शनों के लिए मंदिर पहुंचे।सुबह करीब आठ बजे मंदिर सेवायतों ने राधा-कृष्ण के श्रीविग्रह को गर्भगृह से बाहर जगमोहन में स्थित सोने-चांदी से जड़ित प्राचीन स्वर्ण हिंडोले में विराजमान कराया। हरी पोशाक और मनमोहक श्रृंगार में सजे प्रिया-प्रियतम की झांकी ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। दर्शन के लिए मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। हर कोई राधारानी की इस मनोहारी छवि को अपनी आंखों में बसाने के लिए बेताब नजर आया। सेवायतों की ओर से वृषभान नंदनी को सतरंगी छप्पन भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने भी अपनी आराध्य राधारानी को घेवर और श्रृंगार सामग्री भेंट की। दिनभर मंदिर परिसर में राधे-राधे के जयकारे गूंजते रहे। हरियाली तीज की संध्या को राधारानी की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। मंदिर के गर्भगृह से राधा-कृष्ण के श्रीविग्रह को फूलों से सजे डोले में विराजमान कर मंदिर परिसर में बनी संगमरमर की सफेद छतरी तक ले जाया गया। गोस्वामी समाज के युवक डोले को कंधों पर उठाकर राधारानी के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। साथ चल रहे बुजुर्ग गोस्वामियों द्वारा वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया जा रहा था। गाजे-बाजे के साथ डोला सफेद छतरी पहुंचा तो राधा-कृष्ण के श्रीविग्रह को वहां विराजमान कराया गया।