युवा गजलकार कुमार सत्यम ने महोत्सव में मंच संभालते ही अभी तो शोहरत नई-नई है, लहजा बता रहा दौलत नई-नई है, सुनाकर अपनी उपस्थिति दर्ज की। इसके बाद हम मुस्कुराते रहे, है जिंदगी कितनी खूबसूरत, वक्त का परिंदा जैसे गजलों के जरिये शमा जलाकर गहराती रात से लोगों को बेफिक्र कर दिया। इसके बाद एक से बढ़कर एक गजलों का लुत्फ लोगों ने महोत्सव में देर रात लिया।