गर्भधारण होते ही एनीमिया के साथ थैलेसीमिया और सिकल सेल डिसीज की भी जांच करानी चाहिए। सिकल सेल डिजीज में लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) का रुप बदलकर अर्धवृत्ताकार हो जाता है। ये रक्त वाहिकाओं में फंसने के साथ जल्द नष्ट होती हैं। इससे प्लेसेंटा के असामान्य जगह पर चिपकने से रक्तस्राव और गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है। यह जानकारी बुधवार को मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. लुबना खान ने दी। कानपुर ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी सोसाइटी (केओजीएस) एवं केएमएस के संयुक्त तत्वावधान में स्वरूपनगर स्थित होटल में एनीमिया पर कार्यशाला हुई। डॉ. लुबना खान ने गर्भावस्था में जच्चा-बच्चा पर एनीमिया के असर, जांच, बचाव और उपचार की जानकारी दी। केओजीएस की संरक्षक डॉ. मीरा अग्निहोत्री ने बताया कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत चिकित्सकों को हीमोग्लोबिनोपैथीज और आधुनिक प्रबंधन के प्रति जागरूक करने के लिए कार्यशाला हुई। पैनल डिस्कशन व क्विज के बाद स्वतंत्रता दिवस थीम पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए। इसमें डॉ. किरन पांडेय, डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. कल्पना दीक्षित, डॉ. मनीषा अग्रवाल, डॉ. रेशमा निगम, डॉ. कंचन शर्मा, डॉ. रेनू टंडन, डॉ. किरन सिन्हा आदि शामिल रहीं।