छात्रा जो कक्षा में बाकी बच्चों के साथ पढ़ती, खेलती और खाती है लेकिन जब अन्य बच्चों को पता चलता है कि वह दलित है तो बाकी बच्चे उससे किनारा कर लेते हैं। उसकी पीड़ा जब बच्चों को दिखी तो उन्होंने इस कुरीति को खत्म कर उसे साथ जोड़ लिया। यह कहानी समाज को आईना दिखाने वाली है। ऐसी ही कई कहानियां कहानी दर कहानी में हैं जिसका विमोचन रविवार को डॉ. सुजाता वर्मा स्मृति समिति की ओर से आयोजित राष्ट्रीय हिंदी कथा लेखन पुस्तक विमोचन, प्रतिभा सम्मान व काव्य गोष्ठी में किया गया।