बर्रोहिया अहमदपुर नीभापुर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान सप्ताह में छठवें दिन शुक्रवार को आचार्य धीरेंद्र शास्त्री महाराज ने बृज की लीला, कृष्ण का महारास, मुष्टिक, कंस वध और श्रीकृष्ण-रुक्मणि विवाह की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान भाव के भूखे होते हैं। वह भक्त से अधिक व्याकुल भी होते हैं। उन्होंने कहा कि कंस के अत्याचार से जब पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी तब भगवान कृष्ण अवतरित हुए। कंस को यह पता था कि उसका वध श्रीकृष्ण के हाथों ही होना निश्चित है। इसलिए उसने बाल्यावस्था में ही श्रीकृष्ण को अनेक बार मरवाने का प्रयास किया और हमेशा भगवान का नाम लेता था। श्रीकृष्ण ने अपने मामा कंस का वध कर मथुरा नगरी को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिला दी। उन्होंने कहा कि रुक्मणि को माता लक्ष्मी का अवतार माना जाता है। वह विदर्भ साम्राज्य की पुत्री थीं जो भगवान श्रीकृष्ण से विवाह करने को इच्छुक थी। रुक्मणि के पिता व भाई इस विवाह से सहमत नहीं थे। इसके चलते उन्होंने रुक्मणि के विवाह में जरासंध और शिशुपाल को भी आमंत्रित कर लिया। जैसे ही यह खबर रुकमणी को पता चली, तो उन्होंने दूत के माध्यम से अपने दिल की बात श्रीकृष्ण तक पहुंचाई। असके बाद भगवान का उनके भाई और पिता से काफी युद्ध हुआ। अंततः श्री कृष्ण का विवाह रुक्मणि से हुआ। कथा के समापन पर आरती कर प्रसाद का वितरण श्रद्धालुओं में किया गया। इस मौके पर भूतपूर्व सैनिक राम कैलाश शुक्ला, अंबिका प्रसाद शुक्ल, गायत्री देवी, जगदीश प्रसाद, बड़ेलाल, शंभूनाथ, राजेश, नागेंद्र बृजेश, संजय मौजूद रहे।