गाजीपुर जिले में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को खेल सुविधाएं देने के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाए गए मिनी स्टेडियम अब अपनी बदहाली की कहानी कह रहे हैं। जिले के विभिन्न विकासखंडों में बने नौ मिनी स्टेडियमों में कहीं मैदान में घास-झाड़ियां उगी हैं तो कहीं जर्जर भवन और खराब पेयजल व्यवस्था खिलाड़ियों की राह रोक रही है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इन स्टेडियमों में खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए कोच और फिजिकल ट्रेनर तक उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को निखारने की योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। खेल प्रतिभाओं को गांव स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सादात के बघांव में वर्ष 2001 में 21.50 लाख रुपये की लागत से मिनी स्टेडियम बनाया गया था। वर्ष 2013 में देवकली के बड़हरा, सादात के आतमपुर छपरा, भांवरकोल के शेरपुर, जमानिया के फुफुआंव, रेवतीपुर के उतरौली और भदौरा के मिर्चा में 38.11-38.11 लाख रुपये की लागत से स्टेडियम बनाए गए। भदौरा के उसिया में वर्ष 2005 में 21.50 लाख रुपये खर्च किए गए। इनमें मल्टीपरपज हाल और वाशरूम जैसी सुविधाएं भी बनाई गईं, लेकिन समय के साथ देखरेख के अभाव में व्यवस्थाएं बदहाल होती चली गईं।