बलुआ पंप कैनाल से निकली नहर में लगातार कूड़ा-कचरा फेंके जाने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह कचरा सिंचाई के दौरान खेतों तक पहुंचा तो फसलों का भारी नुकसान तय है। नहरों के पानी के साथ प्लास्टिक, घरेलू अपशिष्ट और सड़ा-गला कूड़ा खेतों में जाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने के साथ-साथ फसलें भी खराब हो सकती हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रत्येक गांव में लाखों रुपये की लागत से आरआरसी सेंटर (कूड़ा संग्रह केंद्र) बनाए गए हैं, लेकिन जिम्मेदारों की निष्क्रियता के कारण ये सेंटर बेकार पड़े हैं। लोग मजबूरी या लापरवाही में कूड़ा अपने घरों के सामने गड्ढों, तालाबों, पोखरों और नहरों में फेंक रहे हैं। इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि खेती-किसानी पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों का आरोप है कि हर गांव में एक से तीन सफाईकर्मी तैनात होने के बावजूद कूड़ा उठान की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है। किसानों ने इस समस्या को लेकर कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे आक्रोश बढ़ता जा रहा है।किसानों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराते हुए नहरों में कूड़ा फेंकने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और आरआरसी सेंटर को सक्रिय कराने की मांग की है। सभी आरआरसी सेंटर कूड़ा एकत्र करने के लिए बनाए गए हैं और नहरों में कूड़ा फेंकने की समस्या गंभीर है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस दिशा में शीघ्र आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।--राजेश नायक, खंड विकास अधिकारी, चहनियां