ग्रामीण खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए करीब दस साल पहले जिले के देवा, मसौली और त्रिवेदीगंज क्षेत्रों में 38-38 लाख रुपये की लागत से तीन मिनी स्टेडियम बनाए गए थे। उद्देश्य था कि ग्रामीण युवाओं को अभ्यास और प्रतियोगिता के लिए मंच मिल सके। पर अब ये स्टेडियम खेल मैदान नहीं, खंडहर बन चुके हैं। देवा के स्टेडियम में झाड़ियां और खरपतवार फैले हैं, मैदान असमतल और बाउंड्री टूटी पड़ी है। मौली का स्टेडियम भवन जर्जर है, दरवाजे-खिड़कियां टूटी हैं और उपकरण कबाड़ हो चुके हैं। त्रिवेदीगंज में तो मैदान पर मवेशियों का कब्जा है। कहीं दीवार गिरी है तो कहीं मैदान तालाब में बदल गया है। स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास विभाग ने निर्माण के बाद कभी रखरखाव नहीं किया। न किसी कोच की नियुक्ति हुई, न किसी खेल आयोजन का नामोनिशान। परिणाम यह कि लाखों रुपये की लागत से बने मैदान अब बेकार पड़े हैं। गांव के खिलाड़ी कहते हैं कि अगर विभाग थोड़ा ध्यान दे तो यही मैदान फिर से खेल से गुलजार हो सकते हैं। लोगों की मांग है कि स्टेडियमों की मरम्मत कराकर उन्हें खेल गतिविधियों के लिए दोबारा शुरू किया जाए, ताकि ग्रामीण प्रतिभाएं फिर से मैदान में लौट सकें। संवाद