कोई सैकड़ों किलोमीटर दूर से कंधे पर कांवड़ उठाए महादेवा की ओर बढ़ रहा है, तो कोई अपनी मनौती पूरी होने पर गंगाजल अर्पित करने दौड़ा चला आ रहा है। पैरों में पड़े छाले, घुंघरुओं की रुनझुन, भूख-प्यास की परीक्षा लेकिन श्रद्धा और विश्वास के आगे ये सारी बाधाएं बौनी नजर आ रही हैं। शिवरात्रि के अवसर पर उत्तर भारत के प्रमुख पौराणिक तीर्थस्थल श्री लोधेश्वर महादेवा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। देश के 52 दुर्लभ शिवलिंगों में शामिल लोधेश्वर महादेव का शिवरात्रि मेला भारत के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक माना जाता है। यहां हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। कांवड़ियों की भक्ति की अनोखी मिसाल सैकड़ों किलोमीटर दूर से पैदल यात्रा कर आ रहे श्रद्धालु रास्ते में बम-बम भोले के जयघोष से माहौल को भक्तिमय बना रहे हैं। कई श्रद्धालु परिवार सहित पैदल चलकर भगवान लोधेश्वर का दर्शन करने पहुंचते हैं। पैरों में छाले और शरीर की थकान भी आस्था के आगे छोटी पड़ जाती है।