बहराइच (रुपईडीहा): नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के मद्देनजर भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। सीमा पर आवागमन करने वाले नागरिकों की सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के जवानों द्वारा सघन जांच की जा रही है। पहचान पत्रों की जांच और नेपाली नागरिकों की नागरिकता की पुष्टि के बाद ही नियमानुसार आवागमन की अनुमति दी जा रही है। भारत और नेपाल के बीच सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब 30 हजार लोगों का आवागमन होता है। हालांकि, नेपाल में नई सरकार द्वारा नेपाली 500 रुपये तक का सामान ले जाने संबंधी प्रबंध किए जाने के बाद सीमा से आवागमन करने वालों की संख्या में कमी आई है। विशेष रूप से भारतीय क्षेत्र से नेपाल जाने वाले लोगों की संख्या में करीब 20 से 30 प्रतिशत की गिरावट देखी जा रही है। नेपाल में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को देखते हुए सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। एसएसबी के जवान नेपाली सुरक्षा कर्मियों और पुलिस के साथ संयुक्त गश्त कर रहे हैं। सीमा से जुड़े सभी बॉर्डर आउटपोस्ट (बीओपी) पर भी सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है। एसएसबी 42वीं वाहिनी के कमांडेंट गिरीश चंद पांडे ने बताया कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। एसएसबी जवान नेपाली सुरक्षा कर्मियों के साथ समन्वय बनाकर गश्त कर रहे हैं और सीमा से होने वाली प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर आवागमन के लिए आधार कार्ड, पैन कार्ड, नेपाली नागरिकता प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट अथवा अन्य वैध पहचान पत्र स्वीकार्य हैं। ऐसा कोई अनिवार्य नियम नहीं है कि केवल मतदाता पहचान पत्र दिखाने पर ही सीमा पार करने की अनुमति दी जाएगी। व्यक्ति की पहचान और यह प्रमाणित करने वाला वैध पहचान पत्र कि वह भारत या नेपाल का नागरिक है, प्रस्तुत करने पर नियमानुसार आवागमन की अनुमति दी जाती है। एसएसबी अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि सीमा पर आवागमन के दौरान अपने साथ वैध पहचान पत्र अवश्य रखें और जांच के दौरान सुरक्षा बलों का सहयोग करें।