भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), दिल्ली से आई कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने मंगलवार को बागपत के लहचौड़ा, रटौल और गौना क्षेत्र का दौरा किया। यहां बड़ी मात्रा में बासमती धान की खेती की जाती है, लेकिन फसल में रोगों और पोषक तत्वों की कमी किसानों के लिए हर साल चुनौती बनती जा रही है। टीम में शामिल वैज्ञानिक डॉ परलाई भौमी, डॉ सत्यप्रिय, डॉ संजय सिंह राठौर और डॉ सत्यप्रकाश ने खेतों में जाकर फसल की स्थिति का निरीक्षण किया और किसानों को रोगों की पहचान और उपचार के बारे में जागरूक किया। वैज्ञानिकों ने बताया: धान की नई और उन्नत किस्में अपनाएं। फसल की समय पर बुआई करें। लौह तत्व की कमी को दूर करने के लिए सल्फर व जिंक का संतुलित प्रयोग करें। पानी की भरपूर व्यवस्था रखें, क्योंकि धान को अधिक जल की आवश्यकता होती है। समय-समय पर कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेकर दवाओं का प्रयोग करें। जलभराव वाले खेतों में मछली पालन कर किसान दुगनी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। इस मौके पर वैज्ञानिकों ने किसान दीपक शर्मा और विनोद शर्मा के खेतों से रोगग्रस्त पौधों के सैंपल भी लिए जिन्हें आगे रिसर्च के लिए प्रयोग किया जाएगा। दौरे में सीताराम, राजकुमार यादव, हरिमोहन प्रधान, मास्टर चंद्रभूषण और बालेश्वर समेत कई स्थानीय किसान मौजूद रहे, जिन्होंने वैज्ञानिकों से सवाल पूछे और सुझाव लिए।