अयोध्या के रूदौली तहसील क्षेत्र में मौलवी अमीर अली शहीद की याद में रहीमगंज में रविवार को तीन दिवसीय उर्स का भव्य आगाज हुआ। उर्स का उद्घाटन अब्बास अली जैदी रुश्दी मियां ने किया। चिरागदान की रस्म के साथ शुरू हुए उर्स में पहले ही दिन बड़ी संख्या में जायरीन पहुंचने लगे। दरगाह परिसर और आसपास का क्षेत्र जायरीन की भीड़ से गुलजार रहा। आयोजकों के मुताबिक तीन दिनों में करीब 50 हजार जायरीन के पहुंचने की उम्मीद है। यह उर्स क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। उर्स में शामिल होने के लिए अयोध्या के साथ बाराबंकी, लखीमपुर-खीरी, पीलीभीत, संभल, कानपुर समेत कई जिलों से जायरीन पहुंच रहे हैं। दूर-दराज से आने वाले लोग निजी वाहनों के साथ बसों से भी पहुंचे। रविवार को करीब 150 बसें आयोजन स्थल के आसपास पहुंचीं। बड़ी संख्या में जायरीन के पहुंचने से रहीमगंज में उर्स की रौनक देखते ही बनी। दरगाह पर चादर चढ़ाने और दुआ करने के लिए लोगों का सिलसिला उर्स तक जारी रहेगा। चिरागदान की रस्म के दौरान दरगाह परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया। चिराग जलने के साथ ही परिसर रोशनी से जगमगा उठा। उर्स के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों के साथ मेले की भी रौनक देखने को मिल रही है। विभिन्न प्रकार की दुकानें सजने लगी हैं। स्थानीय लोगों और दुकानदारों में भी आयोजन को लेकर खासा उत्साह है। तीन दिन होंगी प्रमुख रस्में सफर माह की 25, 26 और 27 तारीख को आयोजित होने वाले उर्स में पहले दिन चिरागदान की रस्म हुई। दूसरे दिन गागर की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें सरबत डालने की परंपरा है। तीसरे दिन कुल और फातिहा के साथ तीन दिवसीय उर्स का समापन होगा। बताया जाता है कि मौलवी अमीर अली शहीद अमेठी जनपद के रहने वाले थे और अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए शहीद हुए थे। उनकी याद में हर वर्ष यह उर्स आयोजित किया जाता है। मेला प्रबंधक बोले: मेला प्रबंधक समीर खान संभा ने बताया कि उर्स की तैयारियां पूरी की गई हैं। दूर-दराज से आने वाले जायरीन की सुविधा का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि हर वर्ष बड़ी संख्या में जायरीन उर्स में पहुंचते हैं। इस बार भी करीब 50 हजार लोगों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय लोगों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है।