निर्मोही अखाड़ा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठाई गई है। इससे पहले हिंदू महासभा ने भी राम मंदिर ट्रस्ट को भंग करने की मांग उठाई है। जिसके बाद ट्रस्ट की स्थापना संबंधी मूल ट्रस्ट डीड और नौ नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर फिर से चर्चा शुरू हो गई है। उपलब्ध ट्रस्ट डीड के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि ट्रस्ट को भंग करने का कोई प्रावधान नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने नौ नवंबर 2019 को अपने फैसले के पैरा 805(2)(i) में केंद्र सरकार को तीन माह के भीतर अयोध्या अधिनियम, 1993 की धारा छह और सात के तहत एक योजना बनाकर ट्रस्ट की स्थापना करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के अनुपालन में भारत सरकार ने पांच फरवरी 2020 को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया और ट्रस्ट डीड निष्पादित की। ट्रस्ट डीड में स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि स्थापित ट्रस्ट अपरिवर्तनीय होगा। इसका अर्थ है कि ट्रस्ट को निरस्त या समाप्त करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। ऐसे में ट्रस्ट डीड के उपलब्ध प्रावधानों के अनुसार, ट्रस्टियों में बदलाव या ट्रस्ट डीड की कुछ धाराओं में सीमित संशोधन संभव हैं, लेकिन ट्रस्ट को भंग करने का कोई स्पष्ट प्रावधान ट्रस्ट डीड में नहीं दिया गया है।