भोर से ही 'सरयू नदी और अन्य प्रमुख घाटों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। स्नान के बाद दर्शनार्थियों द्वारा रामलला और हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना के लिए भी लंबी कतारें लगती हैं। सोमवती अमावस्या पर सरयू नदी में स्नान करना अत्यंत पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इससे सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।