अयोध्या में श्वसन तंत्र की व्यापक समस्या से जूझ रहे ज्यादातर क्षय रोगियों में ई-कोलाई व स्यूडोमोनास नामक बैक्टीरिया कॉमन पाए गए हैं। यह जानकारी राजर्षि दशरथ मेडिकल कॉलेज के टीबी एंड चेस्ट विभाग में बीते वर्ष हुए एक अध्ययन से मिली है। साल भर चले इस शोध के बाद ऐसे रोगियों के इलाज में दो दवाएं अधिक कारगर बताई गई हैं। जागरुकता के अभाव में लंबे समय तक लोग क्षय रोग की चपेट में होने के बावजूद भी बीमारी से अनजान रहते हैं। कई बार वह स्थानीय स्तर पर इलाज कराते रहते हैं, जहां एंटीबॉयोटिक व अन्य दवाओं के अनावश्यक उपयोग से उनकी हालत बिगड़ने लगती है। जब वह हायर सेंटरों पर पहुंचते हैं तो पहले से दवाओं के अनियमित उपयोग के कारण कई तरह की दवाएं उन पर असर नहीं करती हैं, जिनका उन्हें गंभीर परिणाम भुगतना पड़ता है।