बुलंदशहर के प्रधान डाकघर के अधीक्षक त्रिभुवन प्रसाद सिंह उर्फ टीपी सिंह के दिमाग में क्या चल रहा था? इस बात का अंदाजा साथी स्टाफ से लेकर परिवार तक किसी को न था। मगर इतना जरूर है कि उनकी गतिविधियों को याद कर परिवार के सदस्य व साथी अनुमान लगा रहे हैं कि वह रात से ही मन में कुछ गलत पाल बैठे थे। पत्नी का तो इस बात पर रोते हुए बुरा हाल है कि खुद उन्होंने मुझसे ही उस संदूक की चाभी का पता पूछा, जिसमें रायफल रखी थी। अगर जरा भी अंदेशा होता तो शायद जीवन में कभी चाभी न बताती। इसके कुछ देर बाद ही पत्नी को घटना की खबर मिली।