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Shardiya Navratri: माउंटआबू प्रवेश द्वार आबूरोड की तलेटी में विराजमान हैं मुखरी माता, इसलिए पड़ा यह नाम

Wed, 09 Oct 2024 10:26 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही

सार

सिरोही जिले के माउंटआबू प्रवेश द्वार आबूरोड की तलेटी में मुखरी माता विराजमान हैं। ये नाम पड़ने के पीछे एक कहानी है, जिसे इस खबर के जरिए बताया गया है।
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माता का मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सिरोही में शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन आज हम आपको आबूरोड के तलेटी क्षेत्र स्थित मुखरी माता मंदिर के दर्शन करवा रहे हैं। मंदिर में चामुंडा माता विराजमान है। इस मंदिर के नाम के साथ मोर-मोरनी की तपस्या को लेकर भी इतिहास है। इस मंदिर में वैसे तो सालभर श्रद्धालुओं की आवजाही लगी रहती है। लेकिन जब बात नवरात्रि की हो तो भीड़भाड़ और बढ़ जाती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने तथा धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन करने की भी सुविधा उपलब्ध है।

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सिरोही जिले से करीब 70 किलोमीटर दूर आबूरोड के तलेटी में पहाड़ी के ऊपर गुफा में चामुंडा माता (मुखरी माता) विराजमान हैं। आबूरोड रेलवे स्टेशन एवं बस स्टेंड से पांच किलोमीटर सड़क मार्ग का सफर तय कर यहां पहुंचा जा सकता है। अगर आप माउंटआबू जा रहे हैं तो तलेटी तिराहा से महज 500 मीटर के बाद मुख्य रोड के समीप ही मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार नजर आ जाएगा।

यहां से अंदर की ओर जाने के बाद संपर्क सड़क मंदिर तक ले जाएगी। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो। इसके लिए पहाड़ी पर सीढ़ियों तक सड़क बनी है, जहां तक वाहन जाते हैं। ऐसे में हर उम्र के श्रद्धालु बिना किसी परेशानी के यहां तक पहुंच सकते हैं। मंदिर के पास ही श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए करीब एक दर्जन कमरे एवं बरामदा भी बना हैं। जहां पर श्रद्धालु अपने धार्मिक, पारिवारिक एवं सामाजिक आयोजन करते हैं।
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माउंटआबू के प्रवेश द्वार पर विराजमान, इसलिए नाम पड़ा मुखरी माता
गौरतलब है कि आबूरोड के तलेटी से माउंटआबू की चढ़ाई शुरू होती है। इसलिए इसे माउंटआबू का मुख या प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। चामुंडा माता के यहां विराजमान होने से इस मंदिर का नाम मुखरी माता हो गया। मंदिर की दूसरी खासियत यह है कि यहां मोर-मोरनी की तपस्या की भी कहानी है। मंदिर पुजारी सीताराम का कहना है कि सालों पहले शाम होते ही एक मोर-मोरनी का जोड़ा मंदिर में रात्रि विश्राम करने आता था। ये मोर-मोरनी बड़े तपस्वी थे। उनकी इच्छा थी अंतिम समय इसी मंदिर में व्यतीत हो सके। एक दिन सवेरे दोनों मोर मोरनी मृत अवस्था में मिले। तत्कालीन पुजारी द्वारा मोर मोरनी की इच्छानुसार जहां उनकी मौत हुई थी, वहीं पर उनकी समाधि बना दी गई।

चामुंडा माता के विराजमान स्थल के पास ही है गुफा, जो माउंटआबू तक जाती है
मंदिर पुजारी सीताराम के अनुसार, पहाड़ी की एक शिला के नीचे चामुंडा माता के विराजमान स्थल के पास ही एक गुफा भी है, जो माउंटआबू में अधरदेवी (अर्बुदा देवी) मंदिर के समीप तक जाती है। यह करीब 22 किलोमीटर लंबी गुफा है। हालांकि, बीते लंबे समय से यह गुफा बंद है। यहां बकायदा लोहे का भी गेट है। सवेरे शाम दोनों समय इसकी भी पूजा अर्चना की जाती है।

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