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मोगा की मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़ी गेहूं की बोरियां, लिफ्टिंग न होने से किसान परेशान

मोगा जिले की मंडियों में किसानों की मेहनत से तैयार हुई गेहूं की फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी है। सरकारी खरीद प्रक्रिया तेज़ी से तो हुई, लेकिन संबंधित एजेंसियों द्वारा गेहूं की समय पर लिफ्टिंग नहीं होने के कारण किसान और आढ़ती भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। मंडियों में गेहूं की बोरियां लगातार जमा होती जा रही हैं, जिससे नई फसल लेकर आने वाले किसानों को अपनी फसल रखने के लिए जगह नहीं मिल रही। खुले में पड़ी गेहूं की बोरियां मौसम की मार झेल रही हैं, जिससे फसल खराब होने का खतरा भी बढ़ गया है। मोगा जिले में 112 मंडियों में अब तक 572893.35 मीट्रिक टन गेहूं की आमद हो चुकी है, जिसमें से 555058.35 मीट्रिक टन गेहूं की सरकारी खरीद की जा चुकी है। वहीं 217505.20 मीट्रिक टन गेहूं की लिफ्टिंग हो चुकी है। 337553.15 मीट्रिक टन गेहूं लिफ्टिंग बाकी जो कि खुले आसमान के नीचे पड़ी हे। मंडियों में फसल लेकर पहुंचे किसानों ने बताया कि वे भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। लिफ्टिंग न होने के कारण उन्हें फसल रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल रही है। मंडियों में लेबर की भी कमी बनी हुई है, जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं। किसानों का कहना है कि अगर समय पर और तेजी से लिफ्टिंग हो, तभी उन्हें अपनी फसल रखने के लिए जगह मिल पाएगी। उन्होंने बताया कि मंडी से गेहूं की नियमित लिफ्टिंग बेहद जरूरी है, वरना उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। बही आढ़ती एसोसिएशन के जिला प्रधान समीर जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि मोगा मंडी में अब तक 10 लाख बोरी गेहूं की खरीद हो चुकी है, जिनमें से केवल 4 लाख बोरी की ही लिफ्टिंग हो पाई है। बाकी गेहूं मंडियों में खुले में पड़ा होने के कारण आढ़तियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आढ़तियों ने बताया कि इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है और सरकार 12% नमी (मॉइस्चर) पर गेहूं की खरीद कर रही है। लेकिन लिफ्टिंग में देरी होने के कारण गेहूं लगातार धूप में सूख रहा है, जिससे उसकी नमी घटकर 9 से 10% तक रह गई है। इसका सीधा असर वजन पर पड़ रहा है, जहां एक बोरी में लगभग एक से डेढ़ किलो तक गेहूं कम हो रहा है। इस वजह से खरीद एजेंसियां भी नाराज होती हैं, जिसका खामियाजा आढ़तियों को भुगतना पड़ता है। आढ़ती एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि ट्रांसपोर्ट का उचित प्रबंध कर जल्द से जल्द गेहूं की लिफ्टिंग तेज की जाए, ताकि किसानों और आढ़तियों को राहत मिल सके।

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