श्री हरिमंदिर साहिब से 24 जुलाई को अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज की अगुवाई में शुरू किया गया श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के मीरी-पीरी दिवस को समर्पित ‘मीरी-पीरी खालसा मार्च’ मंगलवार को मोगा जिले में पहुंचे थे आज बुधवार भी मोगा के अलग अलग गांव पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने दर्शन किया। जत्थेदार कुलदीप सिंह ने अपने संबोधन में सिखी से जुड़ने का उपदेश दिया और लोगों को नशे से दूर रहने की अपील की। पंजाब में बढ़ते नशे के कारण हो रही नौजवानों की मौतों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। उन्होंने कहा कि सिंथेटिक नशे के चलते हमारे युवा समय से पहले ही दुनिया को अलविदा कह रहे हैं, जो बेहद दुखद और चिंताजनक स्थिति है। यह सरकारों के लिए भी एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।उन्होंने आगे कहा कि नौजवानों का इसमें कोई दोष नहीं है, बल्कि नशे को सुनियोजित तरीके से यहां फैलाया गया है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब नशे की डिलीवरी फोन के जरिए भी आसानी से हो रही है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस गंभीर समस्या पर तुरंत ध्यान दिया जाए और नशे के खात्मे के लिए सख्त कदम उठाए जाएं। इसके साथ ही उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे अपने धर्म और गुरु से जुड़ें, ताकि वे सही रास्ते पर चल सकें और नशे जैसी बुराइयों से दूर रह सकें। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज ने बेअदबी विरोधी कानून को लेकर पंजाब सरकार द्वारा पेश किए गए खरड़ा पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस खरड़ा को पेश करने से पहले पंथ के साथ कोई सलाह-मशवरा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब से स्पष्ट आदेश दिया गया था कि कस्टोडियन से संबंधित दोनों धाराएं हटाई जाएं और जो भी आपत्तिजनक प्रावधान हैं, उन्हें समाप्त किया जाए। इससे कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार सच में बेअदबी की घटनाओं को रोकना चाहती है तो सबसे पहले इसकी जड़ तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1978 से लेकर 2015 तक हुई बेअदबी की घटनाओं के पीछे कौन लोग थे, इसकी गहराई से जांच नहीं की गई। उन्होंने कहा कि जब तक देहधारी गुरुओं और सिख विरोधी डेरों के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।जत्थेदार गड़गज ने कहा कि उन्होंने सरकार को सुझाव दिया था कि कानून में यह प्रावधान भी जोड़ा जाए कि यदि किसी सिख विरोधी डेरा से जुड़े व्यक्ति द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी की जाती है, तो संबंधित डेरा प्रमुख के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाए। लेकिन यह प्रावधान ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पंथ ने कभी भी ऐसा कानून बनाने की मांग नहीं की थी। अगर सरकार कानून बनाती है तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, लेकिन संगत को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का सम्मान और मर्यादा किस प्रकार निभानी है, इसका अधिकार केवल गुरु पंथ और श्री अकाल तख्त साहिब का है। इसमें सरकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। अंत में उन्होंने कहा कि वे खरड़ा का पूरा अध्ययन करने के बाद अपना विस्तृत पक्ष रखेंगे। साथ ही उन्होंने दोहराया कि श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा जिन धाराओं को हटाने की बात कही गई है, उन्हें हटाना अनिवार्य है और पंथ की भावनाओं का सम्मान करना जरूरी है।