नीट पेपर लीक प्रकरण में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज और बल प्रयोग के विरोध में शुक्रवार को फरीदकोट में पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन के नेतृत्व में किसानों, मजदूरों और नौजवान संगठनों ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए छात्रों पर हुए अत्याचार की कड़ी निंदा की। प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों पर बल प्रयोग करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग कर रहे छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता। इस अवसर पर पंजाब स्टूडेंट्स यूनियन की नेता हरबीर कौर, किसान नेता राजिंदर सिंह दीप सिंह वाला और नौजवान नेता शंकर शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि पिछले 12 वर्षों से देश में आरएसएस और भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार का शासन है, जिसमें हर वर्ग की आवाज को दबाने के लिए तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का विरोध करने वालों को देशद्रोही करार देने का माहौल बनाया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार से छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने,पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने तथा नीट पेपर लीक मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की आवाज को दबाने का प्रयास जारी रहा तो विभिन्न जनसंगठन संयुक्त रूप से अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।