बाढ़ प्रभावित गांवों में गाजर और आलू की फसल नहीं हो पाईं है। हुसैनीवाला बार्डर से सटे 17 गांवों में तीन सौ एकड़ से ज्यादा जमीन पर गाजर व आलू की पैदावार होती थी। उक्त फसल नहीं होने से किसानों को लाखों रुपये का नुक्सान हुआ है। सीमावर्ती गांव भाने वाला निवासी किसान गुरदेव सिंह और बाज सिंह ने बताया कि बाढ़ आने के कारण उनके खेतों में रेत और चिकनी मिट्टी भर गई थी । जिसके चलते आलू की फसल नहीं हो पाई और यहां पर लगभग 300 एकड़ से ज्यादा जमीन में आलू की बिजाई की जाती थी। चिकनी मिट्टी को निकाल कर दोबारा से आलू की फसल की बिजाई की है लेकिन यह फसल देरी से होने के चलते किसानों को उतना दाम नहीं मिल पाएगा । जितना पहले मिलना था । सरकार ने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है । बाज ने बताया कि गाजर की फसल लगाई हुई थी। बाढ़ से नष्ट हो गई। यहां से गाजर दूरदराज शहरों में जाती थी। अब बहुत कम लोगों ने दोबारा से गाजर लगाई है लेकिन दाम नहीं मिल पाएगा। बाढ़ से किसानों का बहुत नुक्सान हुआ है।