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Ujjain: भांग और भस्म से सजे बाबा महाकाल, चतुर्थी पर अलौकिक रूप ने मोहा मन; भक्तों ने कतार में लगकर किए दर्शन

Sun, 22 Mar 2026 07:16 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन

श्री महाकालेश्वर मंदिर में चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर रविवार सुबह भस्म आरती के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हजारों भक्त देर रात से ही कतारों में लगकर अपने आराध्य बाबा महाकाल के दर्शन के लिए प्रतीक्षा करते रहे। सुबह 4 बजे भगवान महाकाल को जागृत कर उनका अलौकिक श्रृंगार किया गया और भस्म रमाई गई। पूरे मंदिर परिसर में “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे। मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि भस्म आरती से पहले वीरभद्र जी से आज्ञा लेकर मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह में स्थापित सभी देव प्रतिमाओं का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। भगवान महाकाल का जलाभिषेक दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से किया गया। पूजन के दौरान प्रथम घंटाल बजाकर “हरि ओम” का जल अर्पित किया गया। इसके पश्चात पुजारियों ने भगवान का भव्य श्रृंगार किया और कपूर आरती के बाद उन्हें नवीन मुकुट धारण कराया।

पढ़ें: विश्व जल दिवस आज: कब तक रहेंगे नर्मदा के भरोसे, इंदौर की प्यास बुझाने को नए स्रोतों का विकास जरूरी महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भव्य भस्म आरती सम्पन्न हुई। आज के विशेष श्रृंगार में बाबा महाकाल को भांग, त्रिपुंड, चंद्रमा और बेलपत्र से सजाया गया, जिसने उनके दिव्य स्वरूप को और भी आकर्षक बना दिया। हजारों श्रद्धालुओं ने इस अलौकिक दर्शन का लाभ उठाया। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। आरती का समय: भस्म आरती: सुबह 4:00 से 6:00 बजे तक दद्योदक आरती: प्रातः 7:00 से 7:45 बजे तक भोग आरती: प्रातः 10:00 से 10:45 बजे तक संध्या पूजन: शाम 5:00 से 5:45 बजे तक संध्या आरती: शाम 7:00 से 7:45 बजे तक शयन आरती: रात्रि 10:30 से 11:00 बजे तक मंदिर में आरतियों के ये समय आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक प्रभावी रहेंगे।

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