विश्व संवाद केंद्र में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रशांत भाटिया और शिप्रा पाठक ने जानकारी देते हुए बताया कि इस वर्ष राजधानी में ज्येष्ठ माह के सभी आठ मंगलों पर आयोजित ज्येष्ठ मंगल भंडारा सामाजिक समरसता, सुशासन और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया। उन्होंने बताया कि पूरे लखनऊ में 15 हजार से अधिक भंडारों का आयोजन किया गया, जिसमें 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस बार आयोजन को पूरी तरह हरित भंडारा (ग्रीन भंडारा) के रूप में संचालित किया गया। आयोजकों के अनुसार प्लास्टिक और थर्माकोल के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया। इसके स्थान पर 8 लाख से अधिक पर्यावरण अनुकूल दोने, 4 लाख पत्तलों तथा स्टील के बर्तनों का उपयोग किया गया। इससे बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरे को रोकने में सफलता मिली। पत्रकार वार्ता में बताया गया कि मानव सेवा के साथ-साथ पशु सेवा पर भी विशेष ध्यान दिया गया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बेसहारा पशुओं के लिए पशु भंडारों का भी आयोजन किया गया, जहां उनके लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की गई। इस दौरान डॉ. कृष्ण गोपाल सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने विभिन्न भंडारा स्थलों का निरीक्षण किया और पर्यावरण संरक्षण व सामाजिक सहभागिता के इस प्रयास की सराहना की। आयोजकों ने कहा कि ज्येष्ठ मंगल केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने, सेवा भाव को बढ़ाने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाने का भी माध्यम बनता जा रहा है।