बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान कथित वोटिंग धोखाधड़ी को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। सोमवार को विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर तक पैदल मार्च निकाला, लेकिन यह मार्च संसद परिसर के बाहर ही रोक दिया गया।
विपक्षी दलों का आरोप है कि बिहार में SIR के नाम पर मतदाता सूची में हेरफेर हो रहा है, जिससे लोकतंत्र और मताधिकार को नुकसान पहुंच रहा है। कांग्रेस, शिवसेना (UBT), डीएमके, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के सांसद इस विरोध में शामिल हुए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा—
“जब तक लोगों के मन में चुनावों की निष्पक्षता पर संदेह रहेगा, चुनाव आयोग की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचेगा। आयोग का खुद का हित इन संदेहों को दूर करने में है।”
मार्च में शामिल राहुल गांधी ने SIR को ‘संविधान बचाने की लड़ाई’ बताया। उन्होंने डिजिटल मतदाता सूची में पारदर्शिता की मांग करते हुए कहा कि लोकतंत्र में किसी भी तरह की गड़बड़ी अस्वीकार्य है। प्रियंका गांधी ने भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव करके सत्ता पक्ष चुनावी फायदे के लिए माहौल बना रहा है।
जैसे ही विपक्षी सांसद संसद भवन से निकले, पुलिस ने उन्हें गेट के पास ही रोक दिया। इसके बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत और कई अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। विपक्ष ने इस कार्रवाई को ‘लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन’ बताया।
विपक्ष के आरोपों के तुरंत बाद भाजपा ने भी आक्रामक रुख अपनाया। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर संविधान विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा-
“SIR देश में पहली बार नहीं हो रहा है, लेकिन विपक्ष इसे बहाना बनाकर झूठ फैलाने और अराजकता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। जो लोग लोकतांत्रिक संस्थाओं के खिलाफ काम कर रहे हैं, उनकी अगुवाई राहुल गांधी कर रहे हैं।”
प्रधान ने कहा कि कांग्रेस और विपक्ष पहले भी ईवीएम पर सवाल उठाते रहे हैं, महाराष्ट्र और हरियाणा चुनावों को लेकर भ्रम फैलाते रहे हैं। उनके अनुसार, यह विपक्ष की सोची-समझी रणनीति है ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाकर सियासी लाभ लिया जा सके।
धर्मेंद्र प्रधान ने विपक्ष से कहा कि सड़क पर प्रदर्शन करने के बजाय वे संसद में अपने मुद्दे रखें। उन्होंने उदाहरण दिया कि हाल ही में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर हुई चर्चा के दौरान भी विपक्ष के पास कोई ठोस एजेंडा नहीं था। प्रधान के मुताबिक, विपक्ष जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने में जुटा है।
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची को अपडेट और सत्यापित किया जाता है। विपक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में पक्षपात किया जा रहा है और खास वर्गों के वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं। वहीं, भाजपा का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है, जो पहले भी कई बार हुई है, और इसमें कोई साजिश नहीं है।