अमेरिका ने एक बार फिर भारत के साथ अपने रिश्तों की अहमियत पर जोर दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज की दुनिया में भारत, अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रिश्तों में से एक है। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच संबंध इस समय “असाधारण बदलाव” के दौर से गुजर रहे हैं और आने वाले समय में यह रिश्ता और मजबूत होगा।
रुबियो अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति में बोल रहे थे। यह वही बैठक थी, जिसमें भारत में अमेरिका के नए राजदूत के तौर पर सर्जियो गोर की नियुक्ति पर चर्चा चल रही थी।
मार्को रुबियो ने कहा कि भारत न केवल आज बल्कि भविष्य के लिहाज से भी अमेरिका के लिए अहम है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में दुनिया का राजनीतिक और आर्थिक नक्शा काफी हद तक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तय होगा और भारत इस क्षेत्र का केंद्र है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि अमेरिका ने अपनी सैन्य कमांड का नाम भी बदलकर इंडो-पैसिफिक कमांड किया है। यह फैसला इस क्षेत्र और खासकर भारत की बढ़ती रणनीतिक अहमियत को दर्शाता है।
रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक राजनीति में तेज बदलाव हो रहे हैं। यूक्रेन युद्ध, एशिया-प्रशांत में चीन का बढ़ता दबदबा, और सुरक्षा संतुलन को लेकर पैदा हुई चुनौतियों ने इंडो-पैसिफिक को केंद्र बना दिया है। इस परिप्रेक्ष्य में भारत न केवल एक क्षेत्रीय शक्ति है, बल्कि वैश्विक रणनीति का अहम खिलाड़ी भी बन गया है।
रुबियो ने साफ कहा कि “भारत के साथ मजबूत रिश्ते न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हैं।”
इस बैठक का दूसरा बड़ा पहलू भारत में नए अमेरिकी राजदूत के नाम की पुष्टि का था। पिछले महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की थी कि सर्जियो गोर को भारत का अगला अमेरिकी राजदूत और दक्षिण व मध्य एशियाई मामलों का विशेष दूत बनाया जाएगा।
सिर्फ 38 वर्षीय सर्जियो गोर यदि सीनेट से मंजूरी पा लेते हैं तो वे भारत में अब तक के सबसे युवा अमेरिकी राजदूत बन जाएंगे।
रुबियो ने सर्जियो गोर की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि गोर राष्ट्रपति ट्रंप के बेहद करीबी हैं और सीधे व्हाइट हाउस और राष्ट्रपति से संपर्क रखते हैं। यही वजह है कि उनके पास फैसले करवाने की क्षमता और भरोसा दोनों है।
विदेश मंत्री ने कहा – “जब किसी प्रतिनिधि के पास सीधे राष्ट्रपति तक पहुंच हो, तो वह उस देश के साथ रिश्तों को तेजी से आगे बढ़ा सकता है। मुझे नहीं लगता कि कोई और व्यक्ति इस पद के लिए उनसे बेहतर हो सकता है।”
रुबियो ने कहा कि आने वाले समय में भारत और अमेरिका कई अहम मुद्दों पर साथ काम करेंगे। इसमें यूक्रेन युद्ध पर साझा रणनीति, एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा संतुलन, और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे शामिल होंगे।
उन्होंने कहा – “हम भारत के साथ एक ऐसे दौर में हैं जहां नए अवसर सामने आ रहे हैं। यह रिश्ता आने वाले दशकों तक दुनिया की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।”
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है। रक्षा, तकनीक, व्यापार और कूटनीति – सभी क्षेत्रों में दोनों देशों ने एक-दूसरे का हाथ थामा है। 5जी और सेमीकंडक्टर साझेदारी, क्वाड गठबंधन और संयुक्त सैन्य अभ्यास इस रिश्ते को और गहराई देते हैं।
रुबियो का बयान इस रिश्ते की भावी दिशा की ओर इशारा करता है। साफ है कि अमेरिका भारत को सिर्फ एक साझेदार ही नहीं बल्कि एक रणनीतिक धुरी के रूप में देख रहा है।
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह बयान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और रणनीतिक महत्व की पुष्टि करता है। इंडो-पैसिफिक में भारत की केंद्रीय भूमिका और अमेरिका की भारत पर भरोसा यह दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में निर्णायक होगी।
भारत के लिए यह न केवल कूटनीतिक जीत है बल्कि इस बात का भी संकेत है कि वैश्विक मंच पर उसकी आवाज़ पहले से कहीं अधिक मजबूत हो चुकी है।