RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने बयान पर कहा, " पिताजी मेरे साथ हमेशा रहे हैं। भगवान ने मुझे यह सौभाग्य दिया कि मुझे ऐसे माता-पिता मिले। जिस घर में भाई हो तो उस घर में भाइयों का भी योगदान होना चाहिए। क्या सभी योगदान बेटियों को देना होता है? मैंने सिर्फ अपने भाई को अपने घर से निकाला है। मेरे माता-पिता और बहने मेरे साथ हैं
रोहिणी आचार्य ने अपने माता-पिता के बारे में कई भावनात्मक बातें कही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल अपने भाई को त्यागा है, जबकि उनके माता-पिता और बहनें उनके साथ हैं और उनका समर्थन कर रहे हैं। रोहिणी आचार्य ने मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, "मेरे माता-पिता मेरे साथ हैं और मेरा साथ दे रहे हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि उनके माता-पिता और बहनें उनके लिए रो रहे थे, और वह खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें उनके जैसे माता-पिता मिले। उन्होंने बताया कि उनके पिता (लालू प्रसाद यादव) हमेशा उनके साथ खड़े रहे हैं।
एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने यह भी लिखा कि कल (घटना वाले दिन) एक बेटी मजबूरी में अपने रोते हुए माँ-बाप और बहनों को छोड़ आई, और उनसे उनका मायका छुड़वाया गया, जिसके कारण उन्हें "अनाथ" बना दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें यह सलाह दी गई कि "सभी बेटी-बहन, जो शादीशुदा हैं, उनको मैं बोलूंगी कि जब आपके मायके में कोई बेटा-भाई हो, तो भूल कर भी अपने भगवान रूपी पिता को नहीं बचाएं," और इसके बजाय भाई को ही किडनी देने के लिए कहें। यह सलाह उन्होंने उस आरोप के संदर्भ में दी जब उन्हें यह कहकर अपमानित किया गया कि उन्होंने अपने पिता को अपनी "गंदी किडनी लगवा दी, करोड़ों रुपए लिए, टिकट लिया तब लगवाई गंदी किडनी।"
इस पूरे घटनाक्रम के बाद, उन्होंने कहा कि वह मुंबई अपनी ससुराल जा रही हैं क्योंकि उनकी सास बहुत चिंतित हैं और उन्होंने उन्हें वापस बुला लिया है। कुल मिलाकर, रोहिणी आचार्य ने कहा है कि उनके माता-पिता और बहनें उनके साथ हैं, लेकिन उन्हें अपने मायके से दूर होना पड़ा और इस अनुभव ने उन्हें बहुत दुख दिया।