भगवान शिव की नगरी काशी में राजनीति और धार्मिक प्रतीकों का मेल अक्सर चर्चा का विषय बन जाता है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर ऐसा ही एक आयोजन देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छेड़ दी। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देकर राजनीतिक शिष्टाचार का परिचय दिया, वहीं दूसरी ओर वाराणसी में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके जन्मदिन को अनोखे अंदाज में मनाया। बनारसी कांग्रेस पदाधिकारियों ने राहुल गांधी को भगवान परशुराम के स्वरूप में प्रस्तुत करते हुए उनका चित्र और प्रतिरूप तैयार किया तथा गंगा नदी में जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक किया। कांग्रेस नेताओं का कहना था कि राहुल गांधी सामाजिक न्याय, समानता और जनहित के मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए यह विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।
हालांकि इस आयोजन के सामने आते ही राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। कई लोगों ने इसे कांग्रेस कार्यकर्ताओं की श्रद्धा और राजनीतिक समर्थन का प्रदर्शन बताया, जबकि विरोधी दलों ने इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर आलोचना की। भारतीय जनता पार्टी के नेता गौरव वल्लभ ने इस आयोजन पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं ने भगवान परशुराम के स्वरूप का राजनीतिक उपयोग करके हिंदू आस्था का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय और ईश्वरीय अवतार माने जाते हैं, जिनका योगदान धर्म और न्याय की स्थापना से जुड़ा हुआ है। गौरव वल्लभ ने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी को भगवान परशुराम के रूप में प्रस्तुत करना उचित है और क्या किसी राजनीतिक नेता की तुलना किसी देवी-देवता से की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अक्सर धार्मिक प्रतीकों का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल करती है और इस मामले में भी उसने हिंदू समाज की भावनाओं को आहत किया है। भाजपा नेता ने कांग्रेस से हिंदुओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग भी की।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर राजनीति और धर्म के संबंधों पर बहस को जन्म दे दिया है। जहां कांग्रेस समर्थक इसे अपने नेता के प्रति सम्मान का प्रतीक बता रहे हैं, वहीं भाजपा और उसके समर्थक इसे धार्मिक आस्थाओं के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं। काशी में आयोजित यह जन्मदिन समारोह अब राजनीतिक चर्चा के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी प्रमुख विषय बना हुआ है।