फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mohan Bhagwat on Hindu: हिंदू राष्ट्र पर खुलकर बोले संघ प्रमुख मोहन भागवत, बताया आगामी 30 साल का प्लान!

Mon, 09 Feb 2026 04:30 AM IST
भास्कर तिवारी वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने हाल ही में हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को लेकर खुलकर अपने विचार रखे और साथ ही समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर आगामी 30 वर्षों की दीर्घकालिक योजना का भी संकेत दिया। उनके इस बयान को वैचारिक स्पष्टता के साथ-साथ भविष्य की दिशा तय करने वाला माना जा रहा है। भागवत ने कहा कि संघ का लक्ष्य किसी राजनीतिक सत्ता को हासिल करना नहीं, बल्कि समाज को नैतिक, सांस्कृतिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाना है। उनके अनुसार हिंदू राष्ट्र का अर्थ किसी धर्म विशेष का प्रभुत्व नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था है जिसमें भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना, समरसता और मानव मूल्यों का सम्मान हो।

मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना समावेशी है, जिसमें देश के सभी नागरिक चाहे वे किसी भी धर्म, जाति या वर्ग से हो समान अधिकारों और सम्मान के साथ रह सकें। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी प्राचीन सभ्यता, सहिष्णुता और “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से है, और संघ अगले 30 वर्षों में इसी विचार को समाज के हर स्तर तक ले जाने का काम करेगा। यह योजना शिक्षा, सामाजिक समरसता, परिवार व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी सोच को मजबूत करने पर केंद्रित होगी।

संघ प्रमुख के अनुसार आने वाले तीन दशकों में सबसे बड़ा लक्ष्य चरित्र निर्माण और सामाजिक अनुशासन को मजबूत करना है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल करियर और भौतिक प्रगति तक सीमित न रहें, बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति अपने दायित्वों को भी समझें। भागवत ने कहा कि अगर समाज मजबूत होगा तो राष्ट्र अपने-आप सशक्त बनेगा, और इसके लिए हर व्यक्ति को स्वयं में बदलाव लाना होगा। संघ का कार्य किसी एक संस्था तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के सहयोग से आगे बढ़ने वाला अभियान है।

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने यह भी कहा कि अगले 30 वर्षों में भारत वैश्विक मंच पर एक मार्गदर्शक राष्ट्र की भूमिका निभा सकता है, बशर्ते वह अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा रहे। उन्होंने पश्चिमी मॉडल की नकल करने के बजाय भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित विकास की बात कही। कुल मिलाकर, संघ प्रमुख का यह बयान केवल हिंदू राष्ट्र की व्याख्या तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने आने वाले दशकों के लिए एक वैचारिक रोडमैप पेश किया, जिस पर बहस और चर्चा का दौर तेज होना स्वाभाविक है।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें