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Mamata Banerjee Supreme Court Case on SIR: SC में SIR पर सीएम ममता और CJI के बीच क्या हुई बहस?

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Wed, 04 Feb 2026 06:05 PM IST

पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को लेकर उठा सियासी तूफान अब सुप्रीम कोर्ट की दहलीज तक पहुंच चुका है। खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मामले में न्याय की गुहार लेकर शीर्ष अदालत पहुंचीं, लेकिन कोर्ट रूम में उनकी मौजूदगी ही बहस का नया केंद्र बन गई। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) ने ममता को बीच में टोकते हुए साफ कहा कि उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और श्याम दीवान पहले ही अदालत के सामने सभी दलीलें रख चुके हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 9 फरवरी, सोमवार को होगी।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि वह किसी राजनीतिक मकसद से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए अदालत आई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को बार-बार तथ्यों से अवगत कराया गया, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं सुना गया। इस पर CJI ने टिप्पणी की कि नई याचिका में कुछ नए बिंदु जरूर हैं, लेकिन जो बातें ममता रख रही हैं, वे पहले ही उनके वकील अदालत के समक्ष रख चुके हैं।

ममता बनर्जी ने दावा किया कि चुनाव से ठीक पहले पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। सुनवाई के दौरान उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर के नाम की स्पेलिंग में कथित बदलाव का उदाहरण देते हुए कहा कि जब देश के महान व्यक्तित्वों के नाम तक बदले जा सकते हैं, तो आम नागरिकों के अधिकार कितने असुरक्षित हैं, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि फाइनल वोटर लिस्ट जारी होने में अब केवल 11 दिन बचे हैं और यह प्रक्रिया 14 फरवरी तक पूरी होनी है। वहीं, मामले की सुनवाई के लिए सिर्फ चार दिन का समय उपलब्ध है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में करीब 32 लाख ‘अनमैप्ड वोटर्स’ हैं और लगभग 3.26 करोड़ नामों में ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ पाई गई है, जो कुल मतदाताओं का करीब 20 प्रतिशत है।

श्याम दीवान ने मांग की कि चुनाव आयोग ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में शामिल हर मतदाता का नाम सार्वजनिक करे। उनका कहना था कि कई मामलों में केवल नाम, उम्र और लिंग दर्ज है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि मतदाता का नाम सूची से क्यों हटाया गया। लोगों को यह जानने का अधिकार है कि वे वोटर लिस्ट में क्यों नहीं हैं।

इस पर CJI ने कहा कि उन्हें जानकारी दी गई है कि यह सिर्फ सामान्य सूचना नहीं, बल्कि संबंधित लोगों को व्यक्तिगत नोटिस भी दिए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि यह समय त्योहारों और फसल कटाई का है, जब बड़ी संख्या में लोग अपने गृह जिलों से बाहर रहते हैं। CJI ने सवाल उठाया कि अगर बंगाल में बीएलओ पर दबाव और मौतों की बातें सामने आ रही हैं, तो असम जैसे राज्यों में ऐसी शिकायतें क्यों नहीं हैं।

सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी का तेवर और सख्त हो गया। उन्होंने चुनाव आयोग को “व्हाट्सऐप कमीशन” तक कह दिया। ममता ने कहा, “इलेक्शन कमीशन… सॉरी, व्हाट्सऐप कमीशन यह सब कर रहा है। लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं। बंगाल को टारगेट किया जा रहा है।” उनका आरोप था कि अन्य राज्यों में दस्तावेज स्वीकार किए जा रहे हैं, लेकिन बंगाल के मामलों में उन्हें खारिज किया जा रहा है।

सुनवाई के अंत में CJI ने संकेत दिया कि अदालत समय-सीमा बढ़ाने पर विचार कर सकती है। उन्होंने ममता से कहा कि अदालत को उनके वकील श्याम दीवान की काबिलियत पर पूरा भरोसा है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया कि वह उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट निर्देश लेकर अगली सुनवाई में पेश हो। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार को ग्रुप-बी अधिकारियों की उपलब्ध सूची सौंपने को कहा गया है। सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि चुनाव आयोग ने अधिकारियों के प्रति ‘होस्टिलिटी’ को लेकर लिखित चिंता जताई है।

अब सबकी नजर 9 फरवरी की सुनवाई पर टिकी है, जहां तय होगा कि मतदाता सूची का यह विवाद लोकतंत्र की किस दिशा को संकेत देता है।

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