दिल्ली दंगा मामले में UAPA के तहत आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को ज़मानत न देने वाले अपने ही पुराने फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली बेंच ने गंभीर सवाल उठाए हैं। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित सुनवाई का अधिकार सबसे अहम है। क्या UAPA मामलों में भी “बेल नियम है और जेल अपवाद” का सिद्धांत लागू होगा? क्या यह टिप्पणी भविष्य के बड़े कानूनी बदलाव का संकेत है?