इस्राइल और ईरान के बीच दो सप्ताह से चल रहे सैन्य संघर्ष के बीच भारत ने अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए ऑपरेशन सिंधु चलाया हुआ है। इस ऑपरेशन के तहत रविवार रात साढ़े 11 बजे ईरान के मशहद शहर से एक विशेष विमान 285 भारतीय नागरिकों को लेकर दिल्ली पहुंचा। संकटग्रस्त ईरान से महफूज वापसी के बाद भारतीयों की खुशी देखते ही बन रही थी। एयरपोर्ट पर अपनों से मिलकर उनके चेहरे खिल उठे। ऑपरेशन सिंधु के तहत अब तक कुल 1,713 भारतीय नागरिकों को ईरान से भारत वापस लाया जा चुका है। वहीं राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने कहा, "ईरान से 285 भारतीय नागरिकों को लेकर विशेष निकासी विमान नई दिल्ली पहुंच गया है... उस विमान में 285 भारतीय नागरिक सवार थे, जो मुख्य रूप से 10 राज्यों बिहार, जम्मू कश्मीर, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से थे। ईरान से निकाले गए भारतीय नागरिकों की कुल संख्या अब 1713 हो गई है। हमने अगले 2 दिनों के लिए ईरान से 2-3 और उड़ानें निर्धारित की हैं। इसी तरह, हम ईरान और इज़राइल में रहने वाले अपने सभी भारतीय नागरिकों के साथ भी लगातार संपर्क में हैं वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर पोस्ट में कहा कि ऑपरेशन सिंधु के तहत भारत अपने लोगों को वापस लाने की लगातार कोशिशें कर रहा है। उन्होंने बताया कि 22 जून की रात 11:30 बजे ईरान के मशहद शहर से एक विशेष विमान 285 भारतीयों को लेकर नई दिल्ली पहुंचा। विदेश राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने एयरपोर्ट पर भारतीय नागरिकों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 1,713 भारतीयों को ईरान से वापस लाया जा चुका है। हालांकि सुरक्षित वतन वापसी पर ईरान में फंसे हुए लोगों ने सरकार के प्रति अपना आभार जताया है। क्या कुछ है ईरान से सुरक्षित वतन वापसी पर खुद सुनिए उन्हीं की जुबानी
गौरतलब है कि इस्राइल और ईरान में पिछले कुछ दिनों से सैन्य टकराव बढ़ गया है। दोनों देश एक दूसरे पर बमबारी और मिसाइल हमला कर रहे हैं। सैन्य टकराव के चलते भारत सरकार ने ईरान में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए ऑपरेशन सिंधु चलाया है। यात्रियों ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से वे लोग भारतीय दूतावास के संपर्क में थे. करीब चार-पांच दिन वे ईरान में रहे और उसके बाद वहां से निकालकर भारत लाया गया. उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि भारत सरकार ने युद्ध क्षेत्र से हमें सुरक्षित निकाला है. हमें पहले यह पता चला था कि तुर्कमेनिस्तान या अर्मेनिया के रास्ते निकाला जाएगा, लेकिन आखिर में हमें ईरान से ही फ्लाइट के जरिए लाया गया.”