पापा मुझे बचा लो, मैं नाले में गिर गया हूं। मरने से पहले यही आखिरी शब्द थे युवराज के। एक लड़का को मर रहा था, डूब रहा था, चिल्ला रहा था। रात के अंधेरे में कार की छत पर बैठे उस लड़के को इतनी तो उम्मीद थी कि वो बाहर निकल जाएगा वो बच जाएगा लेकिन उसके सामने सिस्टम बेबस खड़ा था। आखिर में जिंदगी के लिए गिड़गिड़ाते युवराज ने मौत को स्वीकार कर लिया। लेकिन क्या हम ऐसी लापरवाही स्वीकार करेंगे। आज एक बाप अपने बेटे के लिए इंसाफ की गुहार लगा रहा है। 27 साल के इंजीनियर युवराज की मौत ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 16 जनवरी का दिन था, रात का अंधेरा घना कोहरा, सड़कें खामोश थीं, गुरुग्राम की एक नामी आईटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले 27 साल के युवराज मेहता रोज की तरह अपनी कार से घर लौट रहे थे, घर ग्रेटर नोएडा में था, तो जाहिर है रास्ता भी वही होगा। तभी सेक्टर-150 में एटीएस ली-ग्रैंडियोज मोड़ के पास अचानक युवराज की कार कंट्रोल खो देती है। कोहरा इतना घना था कि रास्ते का अंदाजा लगाना मुश्किल था, कार अचानक सड़क किनारे की दीवार तोड़ते हुए पास के एक अंडर कंस्ट्रक्शन मॉल के 40 फीट गहरे बेसमेंट में जा गिरी, ये बेसमेंट बारिश और रिसाव के पानी से पूरी तरह भरा हुआ था. कार जैसे ही गड्ढे में गिरी, युवराज को लगा अब उसकी जान खतरे में है। इसके आगे की कहानी जानने के लिए पूरा वीडियो देखिए।