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नवविवाहिता ने दहेज प्रताड़ना से तंग आकर दी जान

Tue, 01 Jul 2025 09:15 PM IST
आदर्श वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

तमिलनाडु के तिरुपुर से आई ये खबर केवल एक आत्महत्या की नहीं है, यह उस समाज की खामोश बर्बरता की चीख है, जहां बेटियों को दहेज के नाम पर सौंप दिया जाता है और फिर जब उनकी लाश लौटती है, तो सवाल सिर्फ यही उठता है — ‘क्या और दिया होता, तो क्या बच जाती?’ 23 साल की रिधान्या दो महीने पहले एक दुल्हन बनी थी, आज एक संख्या बन गई — दहेज की वजह से आत्महत्या करने वाली बेटियों की सूची में एक और नाम। आइए जानें रिधान्या की आखिरी आवाज, जो उसके पिता के मोबाइल में बंद है और समाज के मुंह पर एक करारा तमाचा।”

तिरुपुर के सफल गारमेंट कारोबारी अन्नादुरई की बेटी रिधान्या की शादी इसी साल अप्रैल में 28 वर्षीय कविनकुमार से हुई थी। शादी वैसी थी जैसी हर बाप अपनी बेटी के लिए चाहता है- शान से, इज्जत से, साज-सज्जा से।
    •    800 ग्राम सोने के गहने
    •    70 लाख रुपये की वोल्वो कार
    •    लाखों का खर्च और ढेर सारा प्यार

लेकिन यही प्यार, यही भरोसा, साजिश में तब्दील हो गया। शादी के कुछ ही दिनों बाद रिधान्या की जिंदगी एक यातना शिविर में बदल गई। ससुराल वाले दहेज के लिए ताना मारते, पति शारीरिक हिंसा करता और रिधान्या धीरे-धीरे टूटने लगी।

रविवार की सुबह रिधान्या ने अपने घरवालों से कहा कि वह मोंडीपलायम के मंदिर जा रही है। उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान थी — जैसे सब ठीक है।
पर वो मंदिर नहीं, मौत से मिलने जा रही थी। वह अपनी वोल्वो कार में बैठी और रास्ते में कहीं रुककर कीटनाशक की गोलियां खा लीं।

जब कार कई घंटे एक ही स्थान पर खड़ी दिखी, तो राहगीरों को शक हुआ। पुलिस को सूचना दी गई। सेयूर पुलिस जब मौके पर पहुंची और कार खोली — तो अंदर रिधान्या की निर्जीव देह थी। चेहरे पर झाग, होंठ नीले और दिल की धड़कन हमेशा के लिए थमी हुई।

पुलिस उसे जिला अस्पताल ले गई। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पर सवाल अब भी जिंदा थे:
    •    एक पढ़ी-लिखी, संपन्न परिवार की लड़की भी दहेज की बलि चढ़ी?
    •    क्या बेटी का हर सपना, शादी के नाम पर बेच दिया गया?

बाहर अस्पताल में उसका पिता, मां और रिश्तेदार चीख-चीखकर एक ही बात कह रहे थे — “हमने सब कुछ दिया था, फिर भी हमारी बच्ची नहीं बची!”

मौत से पहले रिधान्या ने अपने पिता को 7 व्हाट्सएप ऑडियो मैसेज भेजे। हर एक संदेश उसकी टूटी आत्मा की गवाही है।

वह कहती है:

“पापा, ये शादी एक साजिश थी। कोई मेरी बात नहीं सुनता। आप भी सोचते होंगे मैं झूठ बोल रही हूं, लेकिन ऐसा नहीं है। सब झूठ बोल रहे हैं। हर दिन मुझे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। अब और नहीं सहा जाता।”

“हर कोई कहता है कि समझौता कर लो। लेकिन कितनी बार करूं समझौता? जब हर दिन आत्मा मर रही हो, तो जीना क्यों?”

“पापा, मैं आपको बोझ नहीं बनना चाहती। मुझे माफ कर देना। अब सब खत्म हो गया है।”

उसकी आवाज में कंपकंपी है, दर्द है, और सबसे बड़ा सच — सिस्टम से हार मान चुकी एक बेटी की चुप्पी।

रिधान्या के पिता की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज किया।
आरोपी हैं:
    •    कविनकुमार (पति)
    •    ईश्वरमूर्ति (ससुर)
    •    चित्रादेवी (सास)

इन पर दहेज के लिए प्रताड़ना, आत्महत्या के लिए उकसाने, घरेलू हिंसा जैसी धाराएं लगाई गई हैं।
पुलिस ने कहा है कि जल्द ही गिरफ्तारी की जाएगी और चार्जशीट दाखिल की जाएगी।

जैसे ही खबर फैली, अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई।
हर कोई यही कह रहा था — “यह आत्महत्या नहीं, धीमी ज़हर देकर की गई हत्या है!”

लोगों ने प्रशासन से मांग की कि:
    •    केस को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाए
    •    आरोपी को उम्रकैद या मृत्युदंड मिले
    •    हर शादी से पहले और बाद में मनोरोग और कानूनी काउंसलिंग अनिवार्य की जाए


रिधान्या की मौत केवल एक परिवार की कहानी नहीं — यह एक राष्ट्रीय त्रासदी है। हर दिन भारत में औसतन 20 से ज़्यादा महिलाएं दहेज के कारण अपनी जान गंवाती हैं। कानून है, समाज है, शिक्षा है — फिर क्यों नहीं रुकती ये होली?

क्या अब भी शादी में गहने और गाड़ी देने से बेटी की जान की कीमत तय होगी?
क्या समाज कभी उस बेटी को दोषी मानना बंद करेगा जो प्रताड़ना के खिलाफ बोलती है?

रिधान्या अब एक नाम नहीं, एक चेतावनी है। उसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग हर उस पिता को सुननी चाहिए, जो बेटी की शादी में सब कुछ लुटा देने को तैयार है,
और हर उस मां को, जो बहू से कहती है — “थोड़ा सह लो, सब ठीक हो जाएगा।” इस बार कुछ ठीक नहीं हुआ।

“माफ कर देना पापा… अब मैं नहीं रह सकती” — ये शब्द रिधान्या के थे।
लेकिन ये शब्द हर उस बेटी के हैं, जो रोज मरती है, लेकिन बोल नहीं पाती।

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