मौसम की मार से गुजारे लायक फसल की आस भी दम तोड़ रही
50% तक पैदावार गिरने का खतरा, गैर सिंचित इलाकों में हालात खराब
जिले में करीब 65 प्रतिशत फसल गैर सिंचित इलाकों में होती है तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला की पारंपरिक एवं प्राथमिक फसलों में शुमार गेहूं की फसल पर मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। बारिश पर निर्भर इलाकों में 40 प्रतिशत तक फसल उगी ही नहीं। जहां फसल उगी, वह कोहरे में झुलस रही है। बीते कई दिन में किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं लेकिन अभी तक निराशा ही हाथ लगी है। जिले में करीब 35000 हेक्टेयर जमीन पर गेहूं की फसल तैयार होती है। इसमें से 65 प्रतिशत के आसपास क्षेत्र बारिश पर निर्भर है। लेकिन, गेहूं की बिजाई को डेढ़ माह से अधिक समय बीत चुका है। किसानों ने फसल की बिजाई भी बिना बारिश के की। उसके बाद भी लंबे समय तक बारिश न होने से फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है। क्षेत्र में बीते अक्तूबर के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश हुई थी। कुल मिलाकर जिला में बारिश हुए ढाई माह का समय बीत चुका है। मौसम की मार फसलों पर पड़ रही है। विशेषकर बंगाणा, चिंतपूर्णी, अंब, गगरेट, हरोली क्षेत्र के कई इलाकों में सिंचाई सुविधा नहीं है। वहां के किसानों को अपने गुजारे लायक गेहूं की फसल तैयार करना भी मुश्किल हो चला है।
बारिश और सिंचाई के जोर पर तैयार होने वाली फसल में जमीन आसमान का अंतर होता है। कहा कि सिंचाई सुविधा से वंचित इलाकों में तो किसान चिंतित हैं, लेकिन अगर जल्द बारिश नहीं होती तो सिंचाई सुविधा वाले इलाकों में भी फसल की पैदावार गिरना तय है। -किसान प्रेम चंद
फसल लगभग तबाह है। कई वर्ष से ऐसी स्थिति नहीं देखी कि इतने लंबे समय तक गेहूं को बारिश नसीब न हो। फसल लगभग बर्बाद है। खेत खाली हैं। उगी फसल कोहरे से जल रही है तो 40 प्रतिशत से अधिक गेहूं बिना नमी के उगा ही नहीं। -किसान सुनील कुमार
गेहूं और खाद को महंगे दाम पर खरीदकर किराये पर ट्रैक्टर जुटाया। उसके बाद बिजाई कर पाए। इस प्रक्रिया में काफी खर्च हुआ। अब फसल को बचाने के लिए जेब ढीली हो रही है। बारिश का कोई विकल्प भी नहीं। जमीन पूरी तरह सूखी है। अब बारिश हो भी जाए तब भी पैदावार में गिरावट होगी। -किसान बलबीर चंद
गेहूं ही एकमात्र फसल है, जिसे सिंचित और गैर सिंचित इलाकों के सभी किसान तैयार करते हैं। अगर यही हाल रहा तो खाने के लाले पड़ जाएंगे। किसान एक साल से अधिक अनाज अपने पास नहीं रखता। क्योंकि हर वर्ष नई फसल घर आती है। इस बार स्थिति ऐसी है कि किसान को अनाज खरीदना पड़ेगा। -किसान प्रवीण कुमार
कोट्स
जिले में गेहूं की फसल बिना बारिश के चिंताजनक स्थिति में है। खासकर गैर सिंचित इलाकों में फसल प्रभावित हुई है। बारिश के बिना फसल को बचाना किसी प्रकार से संभव नहीं है। हर फसल को समय-समय पर पानी की आवश्यकता रहती है। अभी तक बारिश न होने से गेहूं का पौधा वृद्धि नहीं कर रहा और कोहरे की मार भी अधिक हो रही है। उम्मीद है कि एक सप्ताह के भीतर बारिश हो। -
कुलभूषण धीमान, उपनिदेशक, जिला कृषि विभाग।