इन दिनों इंटरनेट हमारे जीवन की जरूरत बन गई है। इसे इस्तेमाल करते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है, ऐसा नहीं होने पर किसी के साथ भी ठगी हो सकती है। जो भी लोग सोशल मीडिया से जुड़े हैं, उनको चाहिए कि वह अपनी बातें किसी भी अंजान से शेयर न करें। चालाक लोग दोस्ती के नाम निजी बातें जानकर और तस्वीरें मंगवाकर उससे ब्लैकमेलिंग शुरू कर देते हैं। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बेचड़ का बाग में मंगलवार को अमर उजाला फाउंडेशन के सौजन्य से आयोजित पुलिस की पाठशाला कार्यक्रम में यह बात अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश रोल्टा ने कही। एएसपी योगेश रोल्टा ने छात्र-छात्राओं को साइबर क्राइम, यातायात व नशे पर सचेत किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने टैक्नॉलाजी का इस्तेमाल अपनी पढ़ाई और ज्ञान बढ़ाने के लिए ही करने की अपील की। इससे पूर्व उनके कार्यक्रम में पहुंचने पर मुख्यातिथि का फूलमालाओं और बैंड बाजे के साथ जोरदार स्वागत हुआ। प्रधानाचार्य चिंतामणि शर्मा ने शॉल टोपी और मफलर देकर उनको और विशिष्ट अतिथियों को सम्मानित किया। एएसपी योगेश रोल्टा ने साइबर क्राइम को बहुत ही सरल और रोचक ढंग से बच्चों के समक्ष रखा। उन्होंने यातायात नियमों को भी बच्चों से सांझा करते हुए सभी से उनका पालन करने का आह्वान किया। एएसपी ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नशे से बुरी चीज कोई दूसरी नहीं है। आस-पड़ोस में कोई बच्चा नशा कर रहा है तो उसके घर और स्कूल में जरूर जानकारी दें, ऐसा करना हमारा सामाजिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि यदि नशा करना ही है तो पढ़ाई, खेल और अच्छे कामों का करो। इस अवसर पर उपप्रधानाचार्य ओपी पुंडीर, डीएलवी लेखराज, पूर्व प्रधान सतपाल मान समेत समस्त स्कूल स्टॉफ मौजूद रहा। 1. छात्रा रितु शर्मा ने कहा कि कार्यक्रम बहुत ज्ञानवर्धक रहा। विशेषकर साइबर क्राइम पर मिली जानकारी बहुत अच्छी लगी। 2. छात्रा प्रीतिका शर्मा ने कहा कि इससे पहले नशे और साइबर क्राइम पर इतने सरल और सहज तरीके से किसी ने भी जागरूक नहीं किया। 3. अधीक्षक ग्रेड-2 अजय जोशी ने कहा कि जिले के दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में जो इस तरह के कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं, वह बहुत सराहनीय है। 4. शिक्षक श्वेता पुंडीर ने कहा कि अमर उजाला ने जो बच्चों की प्रतिभा को सामने लाने के लिए जो, बच्चों एक कोना सिर्फ आपके लिए.., अभियान छेड़ा है, वह शानदार है। 5. प्रधानाचार्य चिंतामणि शर्मा ने कहा कि दुर्गम क्षेत्र के स्कूलों को इस तरह के कार्यक्रम के लिए चुनने का जो प्रयास है, उसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।