नाहन में मार्च के चौथे मंगलवार को बासड़े का पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। शहरवासियों ने शीतला माता मंदिर पहुंच कर बासी भोजन प्रसाद के रूप में चढ़ाया। इस पर्व को लेकर लोगों की भारी भीड़ रात 12:00 बजे के बाद ही बस अड्डा के समीप शीतला माता मंदिर पहुंच गई। जहां सुबह तक लंबी लाइन में लगकर श्रद्धालुओं ने अपनी बारी का इंतजार किया। अपनी बारी आने पर लोगों ने माता के दरबार में माथा टेका और भोजन प्रसाद के रूप में चढ़ाया। गौरतलब है कि चैत्र मास के पहले और दूसरे मंगलवार को लोग बड़ी संख्या में माथा टेकने के लिए यहां पहुंचते हैं। खास बात यह है कि सोमवार को लोग जो अपने घरों में पकवान बनाते हैं, उसी पकवान को लोग देर रात के बाद माता के दरबार में चढ़ाते हैं। इसमें मुख्य रूप से हलवा पूरी, गुलगुले, गुड़ की भेली और चने की दाल आदि शामिल हैं। यही कारण है कि माता के दरबार में बासा भोजन चढ़ाने की वजह से इस पर्व को बासड़े कहा जाता है। मान्यता के अनुसार यहां नवविवाहित जोड़े और छोटे बच्चों को माथा टेकने के लिए विशेष रूप से लाया जाता है। मान्यता यह भी है कि बच्चों के यहां माता देखने से उन्हें भविष्य में चिकन पॉक्स जैसी बीमारी नहीं होती। लोगों का मानना है कि शीतला माता बच्चों को शीतलता प्रदान करती है। यही कारण है कि हर वर्ष यह पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।