मंडी शहर निवासी प्रवीण शर्मा की नवीन सोच पर केंद्र सरकार ने अपनी मुहर लगाते हुए चिनाव के पानी को ब्यास नदी में मिलाने के लिए 2352 करोड़ के प्रोजेक्ट को मंजूरी प्रदान कर दी है। बता दें कि मंडी शहर निवासी प्रवीण शर्मा ने दस वर्ष पहले केंद्र सरकार को इस संदर्भ में सुझाव दिया था। इस बारे में उन्होंने कई लेख लिखे और केंद्र सरकार को विस्तृत रिपोर्ट भी भेजी थी। अभी हाल ही में जब केंद्र सरकार ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि को समाप्त कर दिया तो उसके बाद प्रवीण शर्मा के इस प्रोजेक्ट पर गौर फरमाते हुए इसे बनाने की हरी झंडी दे दी। प्रवीण शर्मा ने बताया कि प्रोजेक्ट के तहत हिमाचल प्रदेश के लाहुल जिले से होकर बहने वाली चिनाव की सहायक नदी चंद्रा के पानी को छतड़ू के पास डैम बनाकर रोका जाएगा और फिर इसे 8.7 किमी लंबी सुरंग के माध्यम से मनाली के पास ब्यास नदी में मिला दिया जाएगा। प्रवीण ने बताया कि इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान में पानी की कमी को पूरा किया जा सकेगा जबकि 3 से 4 हजार मेगावॉट बिजली का उत्पादन भी किया जा सकेगा। ब्यास नदी वर्ष भर पानी से लबालब रहेगी और एसवाईएल के माध्यम से इसका पानी कई राज्यों को नई संजीवनी प्रदान करेगा। प्रवीण शर्मा ने कहा कि कुछ लोग इस परियोजना से पर्यावरण को नुकसान पहुंचने और हिमाचल को खतरा उत्पन्न होने की भ्रांतियां फैलाने का भी कार्य कर रहे हैं जोकि सही नहीं है। उन्होंने बताया कि परियोजना के तहत नियंत्रित तरीके से ही ब्यास नदी में पानी छोड़ा जाएगा। जब बरसात होगी तो उस वक्त इस पानी की जरूरत नहीं होगी लेकिन गर्मियों में यही पानी अमृत की तरह काम करेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रकार की भ्रांतियों पर ध्यान न दें और केंद्र सरकार की कार्ययोजना पर ध्यान दें।