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Mandi: प्राकृतिक खेती ने बदली किसान सुनील कुमार की जिंदगी, दो बीघा जमीन से सालाना 2 लाख तक की कमाई

हिमाचल प्रदेश सरकार की 'प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना' किसानों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। मंडी जिले के विकास खंड गोपालपुर के खनोट गांव निवासी प्रगतिशील किसान सुनील कुमार इसकी एक सफल मिसाल हैं। प्राकृतिक खेती अपनाकर उन्होंने करीब दो बीघा भूमि से सालाना डेढ़ से दो लाख रुपये तक की आय अर्जित कर यह साबित किया है कि कम जमीन पर भी बेहतर कमाई संभव है। सुनील कुमार कई वर्षों से प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस पद्धति को अपनाने के बाद खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग पूरी तरह बंद हो गया है, जबकि मिट्टी की गुणवत्ता और उर्वरता लगातार बेहतर हुई है। कृषि विभाग और कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण (ATMA) के सहयोग से उन्हें देसी गाय खरीदने, गौशाला के फर्श को पक्का करने, प्लास्टिक ड्रम और अन्य आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए। इन सुविधाओं से प्राकृतिक खेती को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली। सुनील कुमार ने पिछले वर्ष पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती भी शुरू की। उन्होंने पौधों पर लगभग 10 से 15 हजार रुपये का निवेश किया और पहले ही सीजन में 60 से 70 हजार रुपये की आय प्राप्त की। इसमें करीब 50 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। वर्तमान में वे कद्दू, खीरा, लौकी, करेला, भिंडी, टमाटर, शिमला मिर्च, अदरक, अरबी, जिमीकंद, मक्का और गेहूं जैसी कई फसलों की प्राकृतिक खेती कर रहे हैं। प्रदेश सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए किसानों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध करा रही है। योजना के तहत देसी गाय की खरीद पर अधिकतम 25 हजार रुपये, परिवहन के लिए 5 हजार रुपये, गौशाला का फर्श पक्का करने के लिए 8 हजार रुपये तथा 200 लीटर क्षमता वाले प्लास्टिक ड्रम पर 750 रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। सुनील कुमार ने मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मक्का और कच्ची हल्दी के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किए जाने से किसानों को बड़ा आर्थिक संबल मिला है। उनका मानना है कि यदि अधिक किसान प्राकृतिक खेती अपनाएं तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को रसायनमुक्त खाद्यान्न उपलब्ध होगा।

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