कुल्लू। जनजातीय जिला लाहौल-स्पीति में चिनाब नदी पर जलविद्युत परियोजना का निर्माण किसी खतरे से कम नहीं है। किसी भी तरह का मानवीय हस्तक्षेप घाटी के स्वच्छ पर्यावरण को तबाह कर देगा। यह बात जन चेतना समिति लाहौल-स्पीति के अध्यक्ष नवांग तांबा ने कही।
उन्होंने कहा कि सरकार ने हाल ही में प्रदेश में 22 प्रस्तावित नई जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण को मंजूरी प्रदान की है। इसका समिति विरोध करती है। हिमालयी क्षेत्रों में 6.5 से 400 मेगावाट तक बनने वाली जलविद्युत परियोजनाओं के भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।लाहौल-स्पीति में चिनाब नदी बर्फ से ढकी रहती है।
इस पर परियोजना का निर्माण होने से पर्यावरण पर विपरीत असर पड़ेगा। पर्यावरण के छेड़छाड़ करने के भविष्य में भारी अंजाम भुगतने पड़ सकते हैं। ऐसे में ऊंचाई वाले क्षेत्र में जलविद्युत परियोजना का निर्माण करना उचित नहीं है। साल 2010 में उच्च न्यायालय द्वारा गठित अभय शुक्ला समिति की सिफारिश के अनुसार 7,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में इतनी बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं नहीं बनाई जानी चाहिए। ऐसे में चिनाब नदी पर प्रस्तावित परियोजना को न बनाया जाए, ताकि लोगों को विस्थापन और विस्थापन की पीड़ा न झेलनी पड़े।