हमीरपुर जिले में संचालित 28 गोशालाओं में व्यवस्थाओं की कमी नहीं रहेगी। एनजीओ के माध्यम से संचालित गोशालाओं में सुविधाओं के प्रावधान के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। इन गोशाला को संचालित करने वाली संस्थाओं को सशक्कत और आत्मनिर्भर बनाने की योजना पर जिला प्रशासन पशुपालन विभाग के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। इस कड़ी में सभी गोशाला संचालकों से बैठक भी की गई है। गोशालाओं में चारे और पानी की कमी को पूरा करने के साथ इन्हें आर्थिक दृष्टि से मजबूत करने का कार्य किया जाएगा। जिला प्रशासन ने पशुपालन विभाग के अधिकारियों से प्रोजेक्ट की विस्तृत रिपोर्ट से मांगी है। 28 गोशाला में 2200 के करीब पशुधन जिले में मौजूद हैं। अधिकतर गौशालाओं में चारे की कमी पेश आ रही है। पशुओं की चारे और पानी की जरूरतें तक पूरी नहीं हो पा रही है। इन कमियों को देखते हुए डीसी हमीरपुर अमरजीत सिंह के नेतृत्व में बीते दिनों आयोजित संबंधित और गोशाला संचालकों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि एक समग्र रिपोर्ट तैयार कर जरूरतों और संभावनाओं को चिह्ति किया जाए। जिले 28 में से महज तीन से चार ऐसी गोशाला है जोकि एनजीओ और स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से बेहतर ढंग से संचालित की जा रही है। इन गोशाला में कई लोगों को रोजगार भी मिला है और पशुओं की देखरेख भी बेहतर ढंग से की जा रही है। इन गोशालाओं के मॉडल को स्टडी कर सभी में इसे लागू करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए फंड जुटाने के लिए पशुपालन विभाग हमीरपुर के अधिकारी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने में जुट गए है। यह मुहिम रंग लाती है तो पशुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेगी और गोशालाएं आर्थिक रूप से संपन्न होकर स्वरोजगार का केंद्र भी बनेंगी।