बिलासपुर के पंडोखर गांव में आयोजित आत्मा परियोजना शिविर में मौजूद महिला किसान। संवाद
-आतमा परियोजना के तहत हुआ कार्यक्रम का आयोजन
-प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले आदानों के बारे में दी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
जुखाला (बिलासपुर)। आतमा परियोजना के तहत ग्राम पंचायत सिकरोहा और बाड़नू दिग्थली में दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में किसानों को प्राकृतिक खेती में प्रयोग होने वाले आदानों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
परियोजना की ओर से शुभम चड्ढा ने किसानों को प्राकृतिक खेती की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को अधिक खाद देने के दुष्प्रभाव बताए। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती हमारे वातावरण के लिए बहुत लाभकारी है। इससे किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। उन्होंने बताया कि बहुत ज्यादा खाद का प्रयोग मिट्टी की उर्वरक क्षमता को कम कर रहा है। साथ ही यह बीमारियों को भी बढ़ावा दे रहा है। प्राकृतिक खेती से प्राप्त उत्पाद उपभोक्ताओं के लिए भी लाभकारी हैं। बाजार में इनकी कीमत अधिक है और आज इनकी मांग भी बढ़ रही है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वह प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें। इसके अलावा किसानों को प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले आदान के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि किसान एक देशी गाय से गोबर से कई हेक्टेयर पर खेती कर सकते हैं। देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने घटक घनजीवामृत, जीवामृत आदि घटक बनाने से रासायनिक खादों व छिड़काव करने वाले रसायनों पर होने वाले खर्च व इसके दुष्प्रभावों से बच सकते हैं। किसान देसी प्रजाति की गाय जैसे गिर, थारपकर, साहीवाल, रेड सिंधी आदि के गोबर व गोमूत्र से घटक बनाकर अपने खेतों में अच्छी पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। शिविर में चांदपुर, पंडोखर, भोजपुर और दिग्थली के किसानों ने भाग लिया। इस मौके पर कृषि विभाग की ओर से मनीष ठाकुर मौजूद रहे।