शहर में कमर्शियल गैस सिलिंडर की कमी से रेहड़ी संचालकों और छोटे कारोबारियों की परेशानियां बढ़ गई हैं। गैस की उपलब्धता कम होने के कारण कई रेहड़ी संचालकों का कामकाज प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें अपना काम बंद करना पड़ सकता है। जगाधरी के एक निजी अस्पताल के बाहर रेहड़ी लगाने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि गैस की किल्लत का सबसे ज्यादा असर आम लोगों और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार इंडक्शन के इस्तेमाल की बात करती है, लेकिन हर जगह बिजली और इंडक्शन की सुविधा संभव नहीं है। पहले ही 15 साल पहले मिट्टी के तेल (केरोसिन) को बंद कर दिया गया था, ऐसे में अब विकल्प बहुत सीमित रह गए हैं। उन्होंने कहा कि चूल्हा जलाने से प्रदूषण बढ़ेगा और घरों की दीवारें भी काली हो जाएंगी। गैस की कमी होने से घरों में नाश्ता और खाना बनाना भी मुश्किल हो सकता है, जिससे परिवार के बजट पर भी असर पड़ेगा। वहीं रेहड़ी संचालक रमेश कुमार का कहना है कि जब भी गैस का संकट आता है तो उसका बोझ जनता को ही उठाना पड़ता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी को जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि छोटे कारोबारियों का काम प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि अगर सिलिंडर नहीं मिलेंगे तो रेहड़ी संचालकों का रोजगार खतरे में पड़ जाएगा और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा। रेहड़ी संचालक जितेंद्र कश्यप ने भी चिंता जताते हुए कहा कि यदि कमर्शियल सिलिंडर नहीं मिले तो उन्हें सड़कों पर आना पड़ेगा। मिट्टी के तेल से रेहड़ी चलाना संभव नहीं है, इसलिए सरकार को जल्द समाधान निकालते हुए कमर्शियल सिलिंडरों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि छोटे कारोबारियों का काम सुचारु रूप से चल सके। जिला सचिवालय के बाहर चाय की रेहड़ी संचालिका का कहना है कि सभी काम कमर्शियल सिलिंडर पर निर्भर करते हैं और जल्द ही गैस की कमी के चलते ठंडी लस्सी लगाने के लिए तैयारी कर ली है।