जिले में पटवारी और कानूनगो पिछले कई दिनों से हड़ताल पर बैठे हुए हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हड़ताल का मुख्य कारण बाढ़ के दौरान गिरदावरी में फोटो अपलोड करने के तरीके को लेकर सरकार द्वारा छह पटवारियों को निलंबित किया जाना बताया जा रहा है। पटवारी संघ इन निलंबित कर्मचारियों की बहाली की मांग कर रहा है और इसी के विरोध में कामकाज बंद कर दिया गया है। पटवारियों की हड़ताल का सीधा असर पटवारखानों में दिखाई दे रहा है। जमीन रिकॉर्ड से जुड़े काम, इंतकाल (भूमि नामांतरण), जमाबंदी, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य राजस्व संबंधी सेवाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं। रोजाना पटवारखानों में आने वाले लोग बिना काम कराए ही लौटने को मजबूर हैं। कई मामलों में जरूरी दस्तावेज न मिलने के कारण लोगों के निजी और सरकारी काम अटक गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी गंभीर है, जहां जमीन से जुड़े मामलों का निपटारा पूरी तरह पटवारियों पर निर्भर रहता है। किसानों और आम नागरिकों का कहना है कि हड़ताल के कारण उन्हें समय और पैसे दोनों का नुकसान हो रहा है। जनता ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की है, ताकि राजस्व सेवाएं दोबारा सुचारु रूप से शुरू हो सकें।