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खानपुर कलां गांव में पीने के पानी का संकट बना सिरदर्द, गंदे जोहड़ों से पशुओं की बिगड़ रही सेहत

गांव खानपुर कलां में जहां शिक्षा के लिए विश्वविद्यालय और आयुर्विज्ञान संस्थान उत्तर भारत के अपना डंका बजा रहे हैं और ग्रामीण पशुपालन और खेती कर जीवनयापन कर रहे हैं, वहीं मूलभूत सुविधाओं की हालत चिंताजनक बनी हुई है। गांव में पीने के पानी की समस्या और जोहड़ों की सफाई का मुद्दा लगातार गंभीर होता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों का जीवन प्रभावित हो रहा है। गांव में पीने के पानी की सप्लाई नियमित नहीं है। पानी प्रतिदिन आने की बजाय एक दिन छोड़कर आता है, जिससे लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता। ऊपर से सप्लाई का समय भी केवल 30 मिनट का होता है, जिसमें से 15 से 20 मिनट तक गंदा पानी आता है। ऐसे में साफ पानी बहुत कम समय के लिए ही उपलब्ध हो पाता है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कई जगहों पर पानी की पाइप लाइन टूटी हुई है। इन टूटे हुए पाइपों के कारण नालियों का गंदा पानी पीने के पानी में मिल जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है। इस दूषित पानी को पीने से गांव के बच्चे और बुजुर्ग बीमार पड़ रहे हैं, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। दूसरी ओर, पशुओं के लिए बने जोहड़ों में भी पानी की हालत बदतर बनी हुई है। जोहड़ों की सफाई लंबे समय से नहीं हुई है और उनमें गांव की नालियों का गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। इसके कारण जोहड़ों का पानी पूरी तरह दूषित हो चुका है, जिससे पशुओं की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों से गंदे पानी की निकासी के लिए गांव में कोई ठोस प्रबंध नहीं किया गया है। प्रशासन और संबंधित विभाग इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिससे हालात दिन-प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि पानी की सप्लाई को नियमित किया जाए, टूटी पाइप लाइनों को जल्द ठीक किया जाए और जोहड़ों की सफाई कर उन्हें स्वच्छ बनाया जाए। साथ ही गंदे पानी की निकासी के लिए उचित व्यवस्था की जाए, ताकि गांव के लोगों और पशुओं को राहत मिल सके।

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