घरेलू महिलाओं के लिए परिवार के साथ सुकुन के दो पल बिताने के लिए समय नहीं मिल पाता है, लेकिन उन्हीं महिलाओं में से सुनीता भी एक घरेलू महिला हैं। उन्होंने अपने परिवार के साथ समय बिताने के लिए 8 साल पहले बागवानी की शुरुआत की थी। सुनीता बताती हैं कि उनके पति नरेश कुमार भारतीय सेना में कार्यरत थे। उस दौरान वह भी उनके साथ ही लखनऊ में रहती थी। नरेश कुमार अपने शौक के लिए घर पर सजावटी व फूलों के पौधे रखते थे। इनमें पानी व खाद आदि का काम सुनीता अपने पति नरेश कुमार के साथ मिलकर करती थी। तभी उनको बागवानी का विचार आया और पति के रिटायर होने पर साल 2017 में शहर स्थित घर पर बागवानी लगा ली। उनका कहना है कि सुबह कुछ पल ताजी हवा व सुकुन के लिए परिवार के साथ बागवानी में बैठ जाती हैं। फूलों की खुशबू व ताजी हवा से मन भी खुश रहता है और दिमाग भी तरोताजा हो जाता है। बागवानी न होने के कारण फोन व टीवी के सहारे ही रहते थे। अब सभी मिलकर बागवानी में नियमित अंतराल पर मिट्टी की गुड़ाई, खाद व स्प्रे आदि करते हैं।