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लद्दाख में ड्यूटी के दौरान बर्फ में पैर फिसलने से सूबेदार विरेंद्र सिंह शहीद

- बर्फ में पैर फिसलने से घायल हुए थे सूबेदार विरेंद्र सिंह, सैन्य परंपरा वाले परिवार ने खोया अपना सपूत संवाद न्यूज एजेंसी कनीना। देश की रक्षा करते हुए लेह-लद्दाख में तैनात भारतीय सेना के सूबेदार विरेंद्र सिंह का ड्यूटी के दौरान बर्फ में पैर फिसल गया। वीरवार को शहीद का पार्थिव शरीर कनीना में पहुंचा और सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। बता दें कि सूबेदार विरेंद्र सिंह मंगलवार को लेह के बर्फीले क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वे नीचे जा गिरे। इस दौरान उनको गंभीर चोटें आई और वहीं पर अंतिम सांस ली। वीरवार दोपहर 2 बजे शहीद का पार्थिव शरीर लेकर सेना टुकड़ी उनके घर पर पहुंची। यहां पर ग्रामीणों ने जयहिंद व नारों के साथ अंतिम यात्रा में साथ दिया और सायं करीब 4 बजे शहीद पंचतत्व में विलीन हुए। -------- - परिवार अन्य सदस्यों ने भी दिया देशसेवा में योगदान सूबेदार विरेंद्र सिंह का जन्म वर्ष 1980 में कनीना के वार्ड नंबर-1 में जगमाल सिंह के घर हुआ था। वर्ष 2001 में मात्र 21 वर्ष की आयु में उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लिया। प्रारंभिक सैन्य प्रशिक्षण उन्होंने अहमदनगर में प्राप्त किया। वर्तमान में वे सेना की आर्म्ड यूनिट में लेह-लद्दाख के दुर्गम एवं बर्फीले क्षेत्र में तैनात थे। वर्ष 2002 में उनका विवाह हुआ और अब पत्नी, दो बेटियां व एक बेटा छोड़ गए हैं। परिवार में छोटे भाई मनोज व बहन बबली हैं। उनका परिवार लंबे समय से देश सेवा की परंपरा से जुड़ा रहा है। उनके पिता, चाचा, चचेरे भाई-बहन व सगे भाई भी भारतीय सेना में भर्ती होकर देशसेवा में योगदान दे चुके हैं।

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