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VIDEO : कुरुक्षेत्र में आचार्य प्रमोद कृष्णन ने स्वामी दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने का किया आह्वान

कलकी आश्रम के पीठाधीश आचार्य प्रमोद कृष्णन ने कुरुक्षेत्र में स्वामी दयानंद सरस्वती जन्म शताब्दी समारोह में भाग लिया और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के दिखाए मार्ग पर चलने का आह्वान किया और कहा कि उनका पवित्र ग्रंथ ‘सत्यार्थ प्रकाश’ आज भी समाज को सही दिशा दिखा रहा है। सनातन धर्म की महिमा का किया गुणगान आचार्य प्रमोद कृष्णन ने अपने संबोधन में कहा, "अगर हमें सनातन धर्म को समझना है तो सत्यार्थ प्रकाश अवश्य पढ़ना चाहिए।" उन्होंने कहा कि भारत और सनातन धर्म एक दूसरे के पूरक हैं और जो भी सनातन की जड़ों को नहीं समझता, वह भारत की संस्कृति से अंजान है। देशभक्ति की भावना और शहीदों को नमन अपने प्रवचन के दौरान आचार्य ने शहीद भगत सिंह से जुड़े भजन प्रस्तुत किए और देशभक्ति की भावना को जागृत किया। उन्होंने कहा, "जो 'वंदे मातरम्' और 'भारत माता की जय' नहीं बोल सकता, वह भारतीय नहीं हो सकता।" उन्होंने आगे कहा कि यदि भारत ने किसी को नकार दिया तो उसे कोई अन्य देश सहारा देने वाला नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सनातन ही भारत है और भारत ही सनातन। सनातन धर्म की विशेषता पर जोर आचार्य ने कहा कि भले ही यह कहा जाता है कि भारत में सभी धर्मों को समान सम्मान प्राप्त है, लेकिन यह तथ्यपूर्ण नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि सनातन धर्म की जड़ें इसी भूमि में हैं, जबकि अन्य धर्म बाहर से आए हैं, इसलिए वे सनातन के समान नहीं हो सकते।

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