भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद आईसीएआर के महानिदेशक एवं सचिव डेयर डॉ हिमांशु पाठक ने कहा कि जब तक पराली जलने से होने वाले नुकसान को अपना मानकर और सभी मिलकर कार्य करें तो इस समस्या का समाधान शीघ्र ही संभव है। डॉ हिमांशु पाठक शनिवार को केंद्रीय मृदा एवं लवणता अनुसंधान संस्थान करनाल में पराली प्रबंधन पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वयं से प्रेरणा लेकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। वैज्ञानिक हो या अधिकारी, किसान हो या कर्मचारी सभी को अपनी अपनी जिम्मेदारी का सही निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि जो सुझाव इस कार्यशाला में आए हैं उन सभी पर मंथन कर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी तो पराली की समस्या कुछ राज्यों के कुछ जिलों में है लेकिन धीरे-धीरे इसके बढ़ने की भी संभावना है इसलिए इस पर गंभीर प्रयास करने होंगे उन्हें उम्मीद है कि आने वाले कुछ सालों में सब पराली का स्थाई समाधान मिल जाएगा। अटारी लुधियाना के निदेशक डॉक्टर परविंदर श्योराण ने कहा पंजाब के 12 हरियाणा के सात और उत्तर प्रदेश के 6 जिलों में खासतौर पर पराली जलाई जा रही है। यहां मशीनीकरण बढ़ाया जा रहा है।