पिसीएमई (प्रिसिंपल चीफ मैकेनिकल इंजीनियर) डिंपी गर्ग के नेतृत्व में दिल्ली से पहुंची । दिल्ली की टीम शुक्रवार को 11 बजे सीधे रेलवे जंक्शन स्थित हाइड्रोजन प्लांट पर पहुंची। उन्होंने शुरुआत में आरओ सिस्टम के वर्किंग के बारे में जानकारी ली। अधिकारियों ने बताया कि आरओ से निकलने वाले शुद्ध और वेस्ट पानी के लिए अलग-अलग टैंक बना रखे हैं। जब उन्होंने टैंक खोलकर देखा तो पाया कि दोनों टैंक के ढक्कन पर लाल रंग का पेंट किया हुआ था। इस पर पिसीएमई ने कर्मचारियों को निर्देश दिए कि शुद्ध पानी के टैंक पर हरे रंग का पेंट किया ताकि दोनों टैंक की अलग-अलग पहचान हो सके। इसके बाद कर्मचारियों से पानी के टीडीएस की डेली मानिटरिंग के लिए चार्ट बनाने के निर्देश दिए। वहीं टीडीएस मापने के मीटर लगाने के बारे भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पानी के टीडीएस की अलग हर रोज जांच होती रहेगी तो पानी की गुणवत्ता के बारे में जानकारी अपडेट होती रहेगी। इसके अलावा चार्ट पर जानकारी अपडेट होने पर कर्मचारी की जवाबदेही भी तय होगी और कर्मचारी लापरवाही नहीं कर सकेगा। इसके बाद उन्होंने आरओ प्लांट के साथ साथ इलेक्ट्रोलाइजर के बारे में भी जानकारी ली। इलेक्ट्रोलाइजर में गैस बनती है, उसके लिए दो पंप लगाए गए हैं। यदि किसी कारण के पंप बंद हो जाए तो दूसरा पंप सुचारू रूप से चलता रहे और पानी की सप्लाई में कोई दिक्कत नहीं आए। इसके अलावा गैस को इंजन के अंदर से निकाला जा रहा है। इसके बाद दोबारा से टेस्टिंग शुरू होगी। निरीक्षण के दौरान पिसीएमई ने कहा कि आरओ के पानी को पौधों की सिंचाई में नहीं प्रयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि 150 से 200 टीडीएस तक पानी मानव उपयोग के लिए उपयुक्त होता है। इससे कम या ज्यादा टीडीएस वाला पानी मानव के साथ-साथ पौधों के लिए भी नुकसानदायक होता है। कर्मचारियों ने कहा कि आरओ का टीडीएस 500 से ज्यादा है तो इस पर पिसीएमई ने कहा कि यह आरओ का पानी पौधों की सिंचाई के लिए प्रयोग नहीं किया जाए। 150 से कम टीडीएस होने पर पौधे मर जाएंगे। आरओ लगाने वाला ठेकेदार पानी का सैंपल लेकर गए हैं।